
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश और आंधी-तूफान के बीच शुक्रवार से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 56 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बारिश के कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बारिश और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य पूरी गंभीरता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि संकट की स्थिति में किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी का सामना न करना पड़े और जरूरतमंद लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाई जाए।
बारिश से सबसे अधिक मौतें सीतापुर जिले में दर्ज की गई हैं। इसके बाद लखीमपुर खीरी, बहराइच, बलरामपुर, अयोध्या और गोरखपुर में भी बारिश और आंधी से जुड़ी घटनाओं में लोगों की जान गई है। खराब मौसम के कारण राज्य में करीब 1,020 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है।
लगातार बारिश के कारण घाघरा और राप्ती नदियों का जलस्तर कई निगरानी केंद्रों पर बढ़ रहा है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने और प्रभावित लोगों को आवश्यक राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चित्रकूट और कुशीनगर जिलों में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी और कुशीनगर में गंडक नदी के कारण कई क्षेत्रों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत और सहायता पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
राज्य के आठ जिलों में लगातार तीन दिनों से जारी तेज बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग ने आज भी पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है। इसके चलते प्रभावित जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
खराब मौसम को देखते हुए राज्य के कई जिलों में स्कूल और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया गया है। अमरोहा, श्रावस्ती, पीलीभीत और बिजनौर समेत कई जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाना, जलभराव और बाढ़ की स्थिति पर निगरानी रखना तथा संवेदनशील इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लगातार बारिश के बीच नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर भी नजर रखी जा रही है।
राज्य में मौसम की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में राहत एवं बचाव अभियानों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति का आकलन करने और जरूरत के अनुसार लोगों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।




