
महाराष्ट्र सरकार ने 2026 के खरीफ सीजन में कम मानसूनी बारिश के कारण राज्य की 358 में से 265 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित की है। सरकार ने प्रभावित किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए 12 सूत्रीय राहत एवं रियायत पैकेज की भी घोषणा की है। यह फैसला राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश की कमी से फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव के बाद लिया गया है।
राज्य के राहत एवं पुनर्वास विभाग ने शनिवार को सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी कर सूखा प्रभावित तहसीलों की घोषणा की। यह निर्णय सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 के तहत Trigger-1 दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन और कृषि आयुक्त की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का तत्काल पंचनामा करने के निर्देश जिला कलेक्टरों को दिए हैं। प्रशासन को क्षतिग्रस्त खेतों की जियो-टैग्ड तस्वीरें GPS निर्देशांक के साथ जुटाने और कृषि आयुक्त के माध्यम से फसल नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने को कहा गया है।
सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र की कुल 358 तहसीलों में से 265 यानी करीब 75 प्रतिशत तहसील Trigger-1 सूखा गंभीरता श्रेणी में आती हैं। सूखे की घोषणा के बाद इन क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए विभिन्न राहत उपाय लागू किए जाएंगे।
12 सूत्रीय राहत पैकेज के तहत प्रभावित किसानों के लिए भूमि राजस्व की पूरी माफी की घोषणा की गई है। इसके अलावा मौजूदा कृषि ऋणों के पुनर्गठन और कृषि से जुड़े बैंक ऋणों की वसूली पर तत्काल रोक लगाने का फैसला किया गया है।
कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी गई है। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों की बिजली पहले से माफ है, जबकि इससे अधिक क्षमता वाले पंपों के मौजूदा बिजली बिलों पर छूट या रियायत देने की व्यवस्था की गई है।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को भी राहत मिलेगी। सरकार ने इन इलाकों में परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। जहां पेयजल की कमी होगी, वहां पानी के टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने सूखा घोषित गांवों में कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति काटने पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही किसानों और दैनिक मजदूरी करने वाले कृषि श्रमिकों के लिए खाद्यान्न की कमी रोकने के उद्देश्य से लक्षित वितरण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के कार्य तत्काल शुरू करने के आदेश भी दिए गए हैं। सरकार ने पेयजल और पशुधन के लिए जल संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, कोंकण संभाग की 12 तहसीलें, नासिक संभाग की 49, पुणे संभाग की 35, छत्रपति संभाजीनगर संभाग की 74, अमरावती संभाग की 56 और नागपुर संभाग की 39 तहसीलें सूखा प्रभावित घोषित की गई हैं।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने 265 तहसीलों में सूखा घोषित किए जाने की पुष्टि की है। सुनेत्रा पवार फिलहाल नांदेड जिले के सूखा प्रभावित गांवों का दौरा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ है और उन्हें मुश्किल स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दो दिन पहले मराठवाड़ा, विदर्भ और सोलापुर जिले का दौरा किया था। उन्होंने मौजूदा कृषि संकट से निपटने के लिए धन की कमी नहीं होने की बात कही थी। वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विदर्भ के सूखा प्रभावित गांवों का दौरा करते हुए किसानों से हिम्मत नहीं हारने की अपील की और पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।




