
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दवा निर्माण से जुड़े Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य स्टेराइल फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्माण के दौरान ग्रेड A क्लीन एरिया में माइक्रोबियल निगरानी की आवश्यकताओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाना है। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को 28 अक्टूबर को अधिसूचित किया था।
प्रस्तावित संशोधन के तहत ग्रेड A क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की माइक्रोबियल वृद्धि पाए जाने पर जांच शुरू करना आवश्यक होगा। इस कदम का उद्देश्य दवा निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों के नियंत्रण को मजबूत करना और स्टेराइल दवाओं की गुणवत्ता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
Drugs Rules, 1945 में संशोधन की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा निर्माण से संबंधित मौजूदा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके जरिए भारत के नियामक मानकों को स्टेराइल फार्मास्यूटिकल उत्पादों के लिए WHO की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) गाइडलाइंस के अनुरूप बनाने की योजना है।
मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव माइक्रोबियल निगरानी की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है, जहां स्टेराइल दवाओं के निर्माण के दौरान उत्पाद और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण खुले वातावरण में रखे जाते हैं।
ग्रेड A क्लीन एरिया क्यों है महत्वपूर्ण?
ग्रेड A क्षेत्र स्टेराइल फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रित क्षेत्रों में शामिल होते हैं। यहां खुले उत्पादों, कंटेनरों और स्टेरिलाइज किए गए उपकरणों या घटकों को संभाला जाता है।
इन क्षेत्रों में माइक्रोबियल नियंत्रण बेहद जरूरी होता है, क्योंकि किसी भी तरह की सूक्ष्मजीव संबंधी मौजूदगी उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, ग्रेड A क्षेत्र में माइक्रोबियल वृद्धि का कोई भी संकेत मिलने पर उसे जांच शुरू करने का आधार माना जाएगा। इससे ऐसी घटनाओं की पहचान और उनकी जांच को नियामक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकेगा।
स्टेराइल दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर
मंत्रालय का प्रस्ताव माइक्रोबियल नियंत्रण को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य स्टेराइल फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्माण में गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना और संभावित संदूषण से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देना है।
WHO की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस गाइडलाइंस के अनुरूप नियम बनाने से भारत के दवा निर्माण संबंधी नियामक ढांचे में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
आम जनता और संबंधित पक्षों से मांगे सुझाव
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधनों पर संबंधित उद्योग पक्षों और आम जनता से आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित किए हैं।
इस प्रक्रिया के जरिए मंत्रालय प्रस्तावित बदलावों पर हितधारकों की राय प्राप्त करना चाहता है। फिलहाल ये संशोधन प्रस्ताव के स्तर पर हैं। इन पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के बाद आगे की नियामक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।




