
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में भारत लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने गुरुवार को कहा कि देश के लगभग 17 हजार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) अब रक्षा क्षेत्र से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रमुख उद्देश्य रक्षा उत्पादन को पूरी तरह स्वदेशी बनाना और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।
संजय सेठ ने यह बात भारतीय वायुसेना और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘संकल्प’ (SANKALP) विषयक संवादात्मक कार्यशाला के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कही। यह कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और उद्योग जगत, स्टार्टअप तथा रक्षा संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
उन्होंने बताया कि SANKALP का अर्थ है Self-Reliance, Atmanirbhar Bharat, Native Development and Knowledge Linked Partnership। इस पहल का उद्देश्य रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और उद्योगों को रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं से जोड़ना है।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अब रक्षा क्षेत्र को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए भारतीय वायुसेना, SIDM, निजी उद्योगों और स्टार्टअप समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी विकसित की जा रही है। उनका कहना था कि इन सभी संस्थाओं का साझा संकल्प वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय सेठ ने कहा कि स्वदेशीकरण का वास्तविक उद्देश्य केवल आयात पर निर्भरता कम करना नहीं है, बल्कि ऐसा मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है जिसमें नवाचार को प्राथमिकता मिले और नए विचार आधुनिक रक्षा उत्पादों में परिवर्तित होकर देश की सैन्य क्षमताओं को और सशक्त बनाएं।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ती MSME भागीदारी देश के औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी नई गति दे रही है। सरकार लगातार ऐसे वातावरण का निर्माण कर रही है, जिसमें निजी उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थान रक्षा निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकें।
इस अवसर पर संजय सेठ ने ‘SANKALP 2026: Problem Statements of Indian Air Force’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया। इस दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सहित रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम ने भारतीय वायुसेना की स्वदेशीकरण प्राथमिकताओं, दीर्घकालिक रखरखाव आवश्यकताओं और नई तकनीकी प्रगति पर विस्तृत चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया। सरकार का मानना है कि उद्योग, स्टार्टअप और रक्षा संस्थानों के बीच इस प्रकार का सहयोग भविष्य में अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास को गति देगा और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।



