
13 अगस्त तक चलेगा सत्र, सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को लेकर विपक्ष का प्रतीकात्मक वॉकआउट
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश करेगी। सत्र से पहले रविवार को संसद भवन एनेक्सी में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने और रचनात्मक चर्चा में सहयोग करने की अपील की। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इसमें केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और डॉ. एल. मुरुगन सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
40 दलों के 50 से अधिक नेताओं ने लिया हिस्सा
सर्वदलीय बैठक में अपना दल की अनुप्रिया पटेल, जेडीयू के संजय झा, टीडीपी के लावू श्रीकृष्ण देवरायलू, कांग्रेस के जयराम रमेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी समेत करीब 40 राजनीतिक दलों के 50 से अधिक नेताओं ने भाग लिया। सरकार ने सत्र के दौरान विधायी कार्यों और प्रमुख मुद्दों पर सभी दलों का सहयोग मांगा।
एनसीपीआई को लेकर विपक्ष का विरोध
बैठक शुरू होते ही विपक्षी दलों ने नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए प्रतीकात्मक वॉकआउट किया। विपक्ष का कहना था कि एनसीपीआई संसद में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं है। हालांकि विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी दलों के नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए और आगे की चर्चा में हिस्सा लिया।
किरेन रिजिजू ने सदन सुचारु चलाने की अपील की
बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए संसद में सार्थक और सकारात्मक चर्चा जरूरी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे व्यवधान के बजाय मुद्दों पर गंभीर बहस करें, ताकि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों और विधेयकों पर प्रभावी चर्चा हो सके।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित सभी विपक्षी दलों ने एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने के विरोध में बैठक से वॉकआउट किया। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने इसे एनसीपीआई को बैठक में बुलाने के खिलाफ प्रतीकात्मक बहिष्कार बताया।
एनसीपीआई ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने विपक्ष के विरोध की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है और विपक्ष का विरोध राजनीतिक कारणों से प्रेरित है अब सभी की नजर सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र पर रहेगी, जहां सरकार कई अहम विधेयकों को पेश करने के साथ-साथ विभिन्न राष्ट्रीय और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कराएगी।




