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बंगाल चुनाव: रविवार रात से शुरू होगी धरपकड़, ममता की चेतावनी

In Politics
April 13, 2026
RAjneetiGuru.com - बंगाल चुनाव रविवार रात से शुरू होगी धरपकड़, ममता की चेतावनी - Image Credited by The Times of India

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम पर है। रविवार को पूर्व वर्द्धमान के खंडघोष में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर रविवार रात से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं की “बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और हिरासत” की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से “दिमाग का इस्तेमाल” करने और “सतर्क रहने” की अपील की। राज्य में दो चरणों में मतदान होना है—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल, 2026 को।

“15-21 दिनों की बात है, फिर हम देखेंगे”

ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, “भाजपा जानती है कि वह चुनाव हार रही है, इसलिए वह डराने-धमकाने की राजनीति कर रही है। अभी सब कुछ चुनाव आयोग (EC) के हाथ में है, हमारे पास नहीं। अगले 15-21 दिनों तक सतर्क रहें; उसके बाद हम फिर से जीतेंगे और भाजपा से पूछेंगे कि हारना कैसा लगता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रैली की अनुमति देने में देरी की गई, जबकि प्रधानमंत्री की सभाओं को तुरंत हरी झंडी मिल जाती है।

परिसीमन (Delimitation) पर बड़ा आरोप

ममता ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले परिसीमन विधेयक को “बंगाल को तोड़ने की साजिश” बताया। उन्होंने कहा, “वे परिसीमन के जरिए बंगाल को तीन हिस्सों में बांटना चाहते हैं और हमारे कुछ जिलों को बिहार और ओडिशा में मिलाना चाहते हैं। इसके बाद एनआरसी (NRC) लागू कर लोगों को डिटेंशन कैंप में भेजा जाएगा। हमने असम में जो देखा, उसे बंगाल में कभी होने नहीं देंगे।”

वोटर लिस्ट में “महाघोटाला”

निर्वाचन नामावली के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) को मुख्यमंत्री ने “देश का सबसे बड़ा घोटाला” करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या 2024 में मतदान करने वाले सभी लोग अब ‘घुसपैठिए’ हो गए हैं? गौरतलब है कि हालिया आंकड़ों के अनुसार, बंगाल की वोटर लिस्ट से लगभग 91 लाख नाम हटाए गए हैं, जिसे लेकर टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।

महिलाओं के साथ “अभद्र” व्यवहार का मुद्दा

सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाओं के बैग की तलाशी लेना और उनके निजी सामान को बाहर निकालना अपमानजनक है। अभिनेता कंचन मुल्लिक की पत्नी के साथ भी कल ऐसा ही हुआ। हम ऐसी अभद्रता बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, बंगाल में ‘खेला होबे’ का नारा एक बार फिर गूंज रहा है। ममता बनर्जी की “चेतावनी” और “सतर्कता” का आह्वान यह साफ करता है कि आने वाले दो हफ्ते बंगाल की राजनीति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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