
देशभर में मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अब 2 जून से 4 जून के बीच केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इससे पहले मानसून के 26 मई तक केरल पहुंचने की संभावना जताई गई थी, लेकिन मौसमीय परिस्थितियों में बदलाव के कारण इसकी प्रगति धीमी पड़ गई।
क्यों हुई देरी?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती परिसंचरण और बड़े पैमाने पर बदलती पवन प्रणालियों ने मानसून की गति को प्रभावित किया है। हालांकि मानसून ने मई के मध्य में अंडमान सागर क्षेत्र में अपेक्षाकृत जल्दी प्रवेश कर लिया था, लेकिन आगे की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।
IMD किन आधारों पर करता है मानसून की घोषणा?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार केरल में मानसून के आधिकारिक आगमन की घोषणा के लिए कुछ निर्धारित मानदंड पूरे होना आवश्यक हैं:
- केरल के कम से कम 60% निर्धारित मौसम केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक पर्याप्त वर्षा दर्ज हो।
- अरब सागर क्षेत्र में पश्चिमी हवाएं मजबूत होकर लगभग 600 hPa स्तर तक सक्रिय हों।
- बादलों और संवहनीय गतिविधियों का संकेत देने वाला OLR (Outgoing Longwave Radiation) मान 200 Wm⁻² से नीचे हो।
इन सभी मानकों के पूरा होने के बाद ही IMD आधिकारिक तौर पर मानसून के आगमन की घोषणा करता है।
कई जिलों में बारिश का अलर्ट
हालांकि मानसून की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन केरल के कई हिस्सों में भारी बारिश की गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने कुछ जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
प्रमुख प्रभावित जिले:
- Thiruvananthapuram
- Ernakulam
- Kollam
- Kottayam
इन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है केरल में मानसून का आगमन?
केरल में मानसून की एंट्री को पूरे भारत में मानसून सीजन की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। इसके बाद मानसून धीरे-धीरे दक्षिण, मध्य और उत्तर भारत की ओर बढ़ता है। कृषि, जल संसाधन और तापमान में राहत के लिहाज से यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल मौसम वैज्ञानिकों की नजर अगले कुछ दिनों के मौसमी संकेतकों पर बनी हुई है। यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो केरल में मानसून का आधिकारिक आगमन जल्द घोषित किया जा सकता है।
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