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ओल्ड मॉन्क को ‘रम’ नहीं, ‘फ्लेवर्ड रम’ बताने पर जोर

In National
September 07, 2026
ओल्ड मॉन्क को ‘रम’ नहीं, ‘फ्लेवर्ड रम’ बताने पर जोर - RajneetiGuru.com

ओल्ड मॉन्क को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ब्रांड के उत्पाद की श्रेणी पर अपना रुख स्पष्ट किया है। FSSAI ने अदालत को बताया कि अतिरिक्त फ्लेवर इस्तेमाल किए जाने के कारण ओल्ड मॉन्क को केवल “Rum” के नाम से बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह मामला उस समय सामने आया जब FSSAI की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित उत्पाद में अतिरिक्त फ्लेवर का इस्तेमाल होता है। प्राधिकरण के अनुसार, इस वजह से उत्पाद को प्राकृतिक रूप से तैयार रम की श्रेणी में रखकर केवल “Rum” के तौर पर बाजार में पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बॉम्बे हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ शामिल हैं। सुनवाई के दौरान FSSAI ने ओल्ड मॉन्क के निर्माताओं द्वारा उत्पाद को “Rum” के रूप में बेचने पर आपत्ति जताई।

प्राधिकरण का कहना है कि ओल्ड मॉन्क में इस्तेमाल किए जाने वाले अतिरिक्त फ्लेवर के कारण इसे प्राकृतिक रम के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर FSSAI ने अदालत से कहा कि उत्पाद की लेबलिंग और बिक्री उसके वास्तविक स्वरूप के अनुरूप होनी चाहिए।

मामला खाद्य और पेय उत्पादों की श्रेणी, लेबलिंग तथा निर्धारित मानकों से जुड़ा है। FSSAI की दलील का सीधा असर इस बात पर पड़ सकता है कि ओल्ड मॉन्क जैसे उत्पादों को बाजार में किस नाम और श्रेणी के तहत पेश किया जाए।

अदालत के समक्ष प्राधिकरण का पक्ष ऐसे समय में आया है जब शराब उत्पादों की लेबलिंग और उनमें इस्तेमाल होने वाले अतिरिक्त अवयवों को लेकर नियामकीय मानकों पर ध्यान बढ़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अदालत की ओर से मामले पर अंतिम फैसला सुनाए जाने की बात नहीं कही गई है।

इसलिए फिलहाल FSSAI की आपत्ति और अदालत में रखी गई दलील ही मामले का प्रमुख आधार है। अंतिम स्थिति बॉम्बे हाईकोर्ट के आगे के आदेश पर निर्भर करेगी।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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