दिल्ली जेलों में अप्राकृतिक मौत पर मिलेगा 7.5 लाख तक मुआवजा

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August 02, 2026
दिल्ली जेलों में अप्राकृतिक मौत पर मिलेगा 7.5 लाख तक मुआवजा - RajneetiGuru.com

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जेलों में हिरासत के दौरान कैदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में उनके परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए नई मुआवजा योजना अधिसूचित की है। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस योजना के तहत मृतक कैदी के निकटतम परिजन या वैध उत्तराधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों के आधार पर अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, यह योजना केवल उन मामलों पर लागू होगी जिनमें दिल्ली की किसी जेल में किसी कैदी की अप्राकृतिक मृत्यु अधिसूचना जारी होने की तिथि या उसके बाद हुई हो। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना और जेल प्रशासन की जवाबदेही को और मजबूत बनाना है।

योजना के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में 5 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इसमें जेल अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, चिकित्सा या पैरामेडिकल कर्मचारियों की लापरवाही तथा कैदी द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले शामिल हैं। सरकार का कहना है कि प्रत्येक मामले का मूल्यांकन अधिसूचित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा और उसी आधार पर मुआवजा तय होगा।

दिल्ली सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था जेलों में मानवाधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को और प्रभावी बनाएगी। साथ ही इससे उन परिवारों को भी आर्थिक राहत मिलेगी, जिन्होंने हिरासत के दौरान अपने परिजन को खोया है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह योजना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अधिसूचित की गई है। उन्होंने कहा कि इससे निर्धारित परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों को समयबद्ध सहायता मिल सकेगी और जेल प्रशासन में पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि जेल प्रशासन को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से मानव गरिमा, पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के शासन के सिद्धांतों को और मजबूती मिलेगी।

सरकार का कहना है कि नई योजना जेलों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में लापरवाही के मामलों पर प्रभावी निगरानी रखने में मदद मिलेगी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिरासत में होने वाली अप्राकृतिक मौतों के मामलों में स्पष्ट मुआवजा नीति लागू होने से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। साथ ही यह व्यवस्था जेल प्रशासन में सुधार और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

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  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

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    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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