
भारत सरकार ने त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कारोबारियों के स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी है। नई व्यवस्था के तहत चीनी डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग सीमा 1,000 क्विंटल तय की गई है। यह संशोधित नियम इस महीने की 15 तारीख से लागू होगा और नवंबर तक प्रभावी रहेगा।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार, स्टॉक सीमा से जुड़े नियमों में बदलाव का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और त्योहारी मांग के दौरान कृत्रिम कमी पैदा होने की संभावनाओं को कम करना है। सरकार ने कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की अवधि को सीमित करते हुए बाजार में चीनी की नियमित आवाजाही बनाए रखने पर जोर दिया है।
नई व्यवस्था में कोलकाता और उससे जुड़े विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ असम के लिए सामान्य सीमा से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है। इन क्षेत्रों में स्टॉक होल्डिंग लिमिट 2,000 क्विंटल निर्धारित की गई है।
मंत्रालय ने बताया कि कोलकाता को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से बड़ी मात्रा में चीनी मिलती है। इसके बाद यहां से पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों में इसकी आपूर्ति होती है। ऐसे में कोलकाता के लिए अधिक स्टॉक सीमा रखने का फैसला क्षेत्रीय आपूर्ति व्यवस्था को ध्यान में रखकर किया गया है।
असम के लिए भी 2,000 क्विंटल की सीमा तय करने के पीछे वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और परिवहन से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। सरकार के मुताबिक, पूर्वोत्तर क्षेत्र में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए असम को यह अतिरिक्त सीमा दी गई है।
इस बीच, सरकार ने कहा है कि देश में चीनी की खुदरा कीमतों में अगस्त के उच्चतम स्तर से लगभग 15 प्रतिशत की कमी आई है। आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन सप्ताह से एक्स-मिल कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
सरकार ने कीमतों में आई इस गिरावट को चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में इसकी व्यवस्थित आपूर्ति के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का परिणाम बताया है। इन उपायों के जरिए उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को सुचारु रखने की कोशिश की जा रही है।
सरकार की ओर से थोक और खुदरा कारोबारियों से भी कहा गया है कि एक्स-मिल कीमतों में हुई उल्लेखनीय कमी का लाभ ग्राहकों तक जल्द पहुंचाया जाए। इसका मतलब है कि थोक और खुदरा स्तर पर कीमतों में कमी का फायदा अंतिम उपभोक्ताओं को भी मिलना चाहिए।
चीनी की मांग त्योहारी अवधि में आम तौर पर बढ़ जाती है। ऐसे समय में सरकार की ओर से स्टॉक सीमा और बाजार आपूर्ति की निगरानी का उद्देश्य कीमतों में अनावश्यक तेजी तथा कृत्रिम कमी की स्थिति को रोकना है। नई सीमा के तहत कारोबारियों को अपने स्टॉक का प्रबंधन निर्धारित अवधि और मात्रा के अनुसार करना होगा।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब खुदरा और एक्स-मिल दोनों स्तरों पर चीनी की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। स्टॉक होल्डिंग अवधि को 15 दिन तक सीमित करने और अधिकांश क्षेत्रों के लिए 1,000 क्विंटल की सीमा तय करने से बाजार में उपलब्धता पर नजर रखने की व्यवस्था और कड़ी होगी।
मंत्रालय ने कारोबारियों से उपभोक्ताओं तक कीमतों में कमी का लाभ पहुंचाने की अपील की है। संशोधित स्टॉक नियम नवंबर तक लागू रहेंगे, जिसके बाद सरकार बाजार की स्थिति और आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय ले सकती है।



