
उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का सोमवार को औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे। उद्घाटन से पहले तीनों नेता उन्नाव जिले में किलोमीटर 49 पर पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण भी करेंगे।
करीब 63 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया गया है। इसके शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच सड़क संपर्क पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह परियोजना दोनों शहरों के बीच यातायात का दबाव कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता भारत का दूसरा सबसे लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ तैयार किया गया है। इसके अलावा यह देश का पहला एक्सप्रेसवे है, जिसका निर्माण स्वचालित (Automated) और इंटेलिजेंट मशीन-गाइडेड निर्माण तकनीक के जरिए किया गया है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सटीकता और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे पर कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्पीड एनफोर्समेंट सिस्टम लगाया गया है, जो निर्धारित गति सीमा का स्वतः निगरानी करेगा। इसके अलावा हर दो किलोमीटर पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स स्थापित किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। पूरे एक्सप्रेसवे की निगरानी के लिए 24 घंटे संचालित दो एकीकृत कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं।
एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की अधिकतम गति के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इसके संचालन के बाद लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रा का समय घटकर 35 से 45 मिनट रह जाने की उम्मीद है। इससे रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों, व्यापारियों और उद्योगों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे पर कारों के लिए 275 रुपये का टोल निर्धारित किया गया है। वहीं, सुरक्षा कारणों से दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह व्यवस्था उच्च गति वाले यातायात को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।
सरकार का मानना है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक तकनीक, उन्नत सुरक्षा सुविधाओं और तेज कनेक्टिविटी से लैस यह एक्सप्रेसवे राज्य में परिवहन व्यवस्था को नया आयाम देगा तथा क्षेत्रीय विकास, निवेश और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।




