
जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि छत्तीसगढ़ का बालोद जिला सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान वर्षा जल के संग्रहण और भूजल पुनर्भरण क्षमता बढ़ाने के लिए 2.85 लाख से अधिक जल संरक्षण एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात के 135वें संस्करण में ‘कैच द रेन’ अभियान को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की अपील के बाद बालोद जिले ने ‘जल संचय जन भागीदारी 2.0’ के तहत उल्लेखनीय कार्य किया है।
इस अभियान में ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी रही। सभी के संयुक्त प्रयासों से जिले में वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से जुड़ी विभिन्न परियोजनाएं लागू की गईं, जिनका सकारात्मक प्रभाव मौजूदा मानसून के दौरान दिखाई देने लगा है।
मंत्रालय ने बताया कि इससे पहले जल संचय जन भागीदारी 1.0 अभियान के तहत भी बालोद जिले ने एक लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया था। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान तथा पूर्वी क्षेत्र (ईस्टर्न ज़ोन) में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था।
जल शक्ति मंत्रालय का कहना है कि बालोद मॉडल सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देने का सफल उदाहरण है, जिसे देश के अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है। इससे वर्षा जल का बेहतर उपयोग, भूजल स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।





