
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई करेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान के राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) में राज्यों से समान नागरिक संहिता लागू करने पर विचार करने का आह्वान किया गया है। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के बजट सत्र में यूसीसी लागू करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की थी।
उन्होंने बताया कि समिति को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगामी नागपुर शीतकालीन विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में पेश करने की तैयारी कर रही है।
सात सदस्यीय समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना देसाई होंगी। इसके अलावा समिति में बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सी. चव्हाण और न्यायमूर्ति एस. जी. मेहरे को शामिल किया गया है।
समिति के अन्य सदस्यों में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व महाधिवक्ता, पद्मश्री सम्मान से सम्मानित संवैधानिक विशेषज्ञ रमेश पतंगे, तथा शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल भी शामिल हैं।
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के वारिस और उत्तराधिकार संबंधी प्रावधान जैसे विषयों को सभी धर्मों के लिए समान रूप से लागू करने का प्रस्ताव है।
न्यायमूर्ति रंजना देसाई इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात सरकारों द्वारा गठित समान नागरिक संहिता विशेषज्ञ समिति की भी अध्यक्ष रह चुकी हैं। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना था जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। इसके बाद गुजरात ने भी अपना यूसीसी कानून पारित किया, जबकि असम इस वर्ष ऐसा कानून पारित करने वाला तीसरा राज्य बन गया।
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि प्रस्तावित कानून से व्यक्तिगत नागरिक कानूनों में समानता लाने और सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।





