
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को अमरावती स्थित राज्य सचिवालय में एल नीनो के संभावित प्रभाव और उससे कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले असर की समीक्षा की। बैठक में विभिन्न विभागों की तैयारियों, किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रमों और संभावित सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य में जुलाई महीने के दौरान 69 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा अगले तीन महीनों में भी वर्षा की कमी 35 से 40 प्रतिशत के बीच रहने की आशंका जताई गई। अधिकारियों ने कहा कि कम बारिश का असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है, जिसके चलते कृषि क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि राज्य के 122 मंडलों को उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में विशेष रूप से धान (पैडी) और कपास (कॉटन) जैसी प्रमुख फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार इन क्षेत्रों की लगातार निगरानी करेगी और आवश्यकता के अनुसार राहत उपाय लागू करेगी।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में जल संकट की आशंका अधिक है, वहां बोरवेल के उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की फसलों को बचाने के लिए वंशधारा नदी के पानी को जरूरत वाले क्षेत्रों तक मोड़ने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों को किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त से राज्यव्यापी किसान जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से किसानों को बदलते मौसम, जल संरक्षण और वैकल्पिक खेती के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन इलाकों में बारिश की कमी के कारण पारंपरिक फसलों को नुकसान होने की आशंका है, वहां वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार आपातकालीन बीज योजना (Emergency Seed Plan) भी लागू करेगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को समय पर उपयुक्त बीज उपलब्ध कराए जा सकें।
राज्य सरकार का मानना है कि समय रहते की गई तैयारी से एल नीनो के संभावित प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कृषि, सिंचाई और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर सरकार किसानों की आजीविका और फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग लगातार स्थिति की निगरानी करें और मौसम के अनुसार त्वरित निर्णय लें। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना और मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखना है।




