
भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ की सुखना झील और उत्तर प्रदेश की सौज झील को इस सूची में शामिल किया गया है। इस उपलब्धि के साथ देश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के प्रयासों को नई मजबूती मिली है।
मंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कहा कि इन महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करना भारत की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
सुखना झील और सौज झील को मिली पहचान
चंडीगढ़ की सुखना झील और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किए जाने से भारत के संरक्षित आर्द्रभूमि नेटवर्क का विस्तार हुआ है। रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियां हैं, जिन्हें अपने पर्यावरणीय महत्व के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दी जाती है।
आर्द्रभूमियां प्राकृतिक पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों को आवास उपलब्ध कराती हैं तथा जल संसाधनों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देती हैं।
नई झीलों को इस सूची में शामिल करना देश में आर्द्रभूमि संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, किसी स्थल को रामसर सूची में शामिल किए जाने के साथ उसके संरक्षण और उचित प्रबंधन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण बनी रहती है।
प्रधानमंत्री के संरक्षण प्रयासों का उल्लेख
कीर्ति वर्धन सिंह ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में संरक्षित पारिस्थितिक तंत्रों का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है, जिससे जैव विविधता के संरक्षण, जल सुरक्षा और जलवायु सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
मंत्री के अनुसार, आर्द्रभूमियों का संरक्षण केवल प्राकृतिक विरासत को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय आजीविका को बनाए रखने में भी मदद करता है। इन क्षेत्रों पर निर्भर समुदायों के लिए जल संसाधन, प्राकृतिक वातावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी का महत्व काफी अधिक है।
उन्होंने इस उपलब्धि को हासिल करने में योगदान देने वाले सभी संबंधित लोगों के प्रयासों की सराहना की।
क्या है रामसर कन्वेंशन?
रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि है। इसकी स्थापना वर्ष 1971 में हुई थी। इस संधि के तहत उन आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की पहचान दी जाती है, जो पारिस्थितिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
रामसर स्थलों की पहचान का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करना और उनके संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करना है। ऐसी आर्द्रभूमियां जैव विविधता को सहारा देने, जल संसाधनों की सुरक्षा और प्राकृतिक पर्यावरण के संतुलन में योगदान दे सकती हैं।
आर्द्रभूमि संरक्षण से जुड़े प्रयासों को बढ़ावा
भारत में रामसर स्थलों की संख्या 103 तक पहुंचना आर्द्रभूमि संरक्षण के दायरे में विस्तार को दर्शाता है। सुखना झील और सौज झील को शामिल किए जाने से चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश की इन आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की पहचान मिली है।
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अब इन क्षेत्रों का प्रभावी प्रबंधन, जैव विविधता की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़े पहलू महत्वपूर्ण होंगे। सरकार की ओर से जताई गई प्रतिबद्धता के अनुरूप, आर्द्रभूमियों का संरक्षण देश की प्राकृतिक विरासत और भविष्य की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए अहम बना हुआ है।





