
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत भारतीय डेवलपर्स ने 23 बड़े अनुबंध हासिल किए हैं। इन अनुबंधों के अंतर्गत आपूर्ति प्रतिबद्धताएं 5.5 लाख मिलियन टन प्रति वर्ष से अधिक बताई गई हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की।
मंत्री के अनुसार, इन अनुबंधों के तहत 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी वैश्विक निर्यात के लिए निर्धारित है। इस उपलब्धि से स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 90 हजार करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इससे भारत को वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने और हरित रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिली गति
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है। इस क्षेत्र में नए अनुबंध हासिल होने से देश की स्वच्छ ऊर्जा संबंधी योजनाओं को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
प्रल्हाद जोशी ने बताया कि भारतीय डेवलपर्स को मिले 23 बड़े अनुबंध इस क्षेत्र में बढ़ती कारोबारी गतिविधियों को दर्शाते हैं। इन अनुबंधों के तहत तय आपूर्ति प्रतिबद्धताएं भारत के हरित हाइड्रोजन उद्योग के विस्तार में भूमिका निभा सकती हैं।
90 हजार करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद
मंत्री के अनुसार, इस उपलब्धि से स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में करीब 90 हजार करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह निवेश हरित हाइड्रोजन से संबंधित परियोजनाओं और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार में महत्वपूर्ण हो सकता है।
हरित हाइड्रोजन को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जाता है। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से नई परियोजनाओं, उत्पादन क्षमताओं और संबंधित उद्योगों के विकास की संभावनाएं बन सकती हैं।
वैश्विक निर्यात पर रहेगा विशेष ध्यान
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि इन अनुबंधों का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वैश्विक निर्यात के लिए निर्धारित है। इससे भारतीय डेवलपर्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
निर्यात पर जोर भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अनुबंधों से जुड़े देशों, कंपनियों, परियोजनाओं की समयसीमा और निर्यात की वास्तविक मात्रा का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
नेट-जीरो लक्ष्य और हरित रोजगार पर जोर
मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की वैश्विक नेट-जीरो नेतृत्व की दिशा में यात्रा को गति दे सकती है। इसके साथ ही हरित रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।
ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में परियोजनाओं के विस्तार से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। भारतीय डेवलपर्स को मिले नए अनुबंध इस क्षेत्र में देश की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं




