चंडीगढ़ – चंडीगढ़ के सेक्टर 33बी में रिकॉर्ड किए गए एक परेशान करने वाले वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है, जिससे भारत में शक्तिशाली सिंथेटिक ओपिओइड (सिंथेटिक नशीले पदार्थ) के संभावित आगमन पर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। 14 मार्च 2026 को रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में एक डिलीवरी एजेंट को दो घंटे से अधिक समय तक पूरी तरह से स्थिर और अनुत्तरदायी खड़ा देखा गया। इस घटना को अक्सर अमेरिका में देखे जाने वाले “फेंटेनल लीन” (Fentanyl lean) से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक व्यक्ति के शरीर में विशिष्ट सिंथेटिक पदार्थों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन वीडियो साक्ष्यों ने चिकित्सा विशेषज्ञों और नेटिज़न्स को “ट्रैंक डोप” (Tranq Dope)—फेंटेनल और ज़ाइलाज़ीन का एक घातक मिश्रण—के प्रति आगाह करने पर मजबूर कर दिया है।
घटना: दो घंटे की जड़ता
चश्मदीदों के अनुसार, डिलीवरी एजेंट को सेक्टर 33बी की एक गली में देखा गया था। राहगीरों ने शुरू में उसे नजरअंदाज किया, लेकिन घंटों तक उसकी कोई हलचल न होने पर लोग घबरा गए। वह व्यक्ति अपने मुंह में “बीड़ी” दबाए, शून्य में ताकते हुए खड़ा था। उसकी शारीरिक स्थिति जड़ता (stupor) जैसी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे चिकित्सा मूल्यांकन के लिए अस्पताल पहुँचाया।
चिकित्सा दृष्टिकोण: ‘जॉम्बी’ घटना क्या है?
“जॉम्बी ड्रग” शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर फेंटेनल और ज़ाइलाज़ीन (पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाला शामक) के मिश्रण के लिए किया जाता है। अमेरिका में इस मिश्रण ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल पैदा कर दिया है। ज़ाइलाज़ीन इंसानों के लिए स्वीकृत नहीं है; जब इसे ओपिओइड के साथ मिलाया जाता है, तो यह घातक ओवरडोज के जोखिम को बढ़ा देता है और उपयोगकर्ता को समाधि जैसी स्थिति में ले जाता है।
वरिष्ठ विषविज्ञानी डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया: “पशु चिकित्सा शामक और ओपिओइड का मिश्रण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को इस हद तक दबा देता है कि व्यक्ति जड़ हो जाता है। वीडियो में देखी गई ‘फ्रोजन’ मुद्रा इसका एक प्रमुख लक्षण है। यह हृदय गति और सांस लेने की गति को खतरनाक स्तर तक धीमा कर देता है।”
सतर्कता की आवश्यकता
चंडीगढ़ की इस घटना की जांच जारी है। चाहे यह मामला किसी सिंथेटिक “जॉम्बी ड्रग” का परिणाम हो या कोई अन्य चिकित्सीय आपातकाल, इसने समाज को सचेत कर दिया है। विशेषज्ञ सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने, आपातकालीन कक्षों में बेहतर नैदानिक उपकरण उपलब्ध कराने और पशु चिकित्सा शामक दवाओं के अवैध वितरण पर कड़ी कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं। भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक जटिल और घातक नए चरण में प्रवेश कर रही है।
