
केरल में एक दशक से चले आ रहे वामतांत्रिक लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के शासन को समाप्त करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.डी. सतीशन ने आज राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ लेने के ठीक बाद, सतीशन ने पहली ही कैबिनेट बैठक में साल 2023 में कांग्रेस और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुई क्रूर राजनीतिक हिंसा के मामलों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यभार संभालते ही पहली फाइल पर किए गए इस हस्ताक्षर ने यह साफ कर दिया है कि नई सरकार राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था के मामलों पर अत्यंत सख्त रुख अपनाने वाली है। यह नई एसआईटी मुख्य रूप से साल 2023 के उत्तरार्ध में तत्कालीन सरकार की ‘नव केरल यात्रा’ के दौरान विपक्ष के प्रदर्शनकारियों पर हुए हमलों और उसमें स्थानीय प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच करेगी।
यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत और राजनीतिक बदलाव
यह प्रशासनिक उलटफेर 9 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद आया है, जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस प्रचंड बहुमत के साथ केरल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हुई है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने वी.डी. सतीशन और उनके 20 सदस्यीय कैबिनेट को शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा सहित देश के कई शीर्ष नेता थिरुवनंतपुरम पहुंचे थे।
पदभार संभालते ही एसआईटी (SIT) के गठन का यह आदेश यूडीएफ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के बीच के पुराने राजनीतिक टकराव को फिर से सतह पर ले आया है। निवर्तमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अब राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका में नजर आएंगे।
क्या है साल 2023 का मामला, जिसकी जांच करेगी SIT?
इस नवगठित विशेष जांच दल का मुख्य ध्यान नवंबर और दिसंबर 2023 की उन घटनाओं पर केंद्रित रहेगा, जिसने केरल की राजनीति में भारी उबाल ला दिया था। उस दौरान तत्कालीन एलडीएफ सरकार ने पूरे राज्य में ‘नव केरल यात्रा’ नामक एक बड़े जनसंपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया था। यूथ कांग्रेस और केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) ने इस यात्रा का पुरजोर विरोध करते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया था। विपक्ष का आरोप था कि राज्य के वित्तीय संकट के बीच इस यात्रा के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया जा रहा था।
यह विरोध प्रदर्शन जल्द ही हिंसक झड़पों में बदल गया था। आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे यूडीएफ कार्यकर्ताओं को सत्तारूढ़ दल के कैडरों द्वारा निशाना बनाया गया और उन पर लाठियों व पत्थरों से हिंसक हमले किए गए। इस मामले में तत्कालीन पुलिस और सुरक्षा बलों पर भी मूकदर्शक बने रहने या प्रदर्शनकारियों के दमन में सक्रिय रूप से शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे। कांग्रेस का आरोप रहा है कि पिछले दो वर्षों के दौरान पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते इन मामलों की जांच को ठंडे बस्ते में डाल रखा था। अब यह नई एसआईटी स्वतंत्र रूप से सारे प्रशासनिक और पुलिस रिकॉर्ड खंगालेगी।
जन कल्याणकारी योजनाएं और नीतिगत फैसले
इस कड़े प्रशासनिक कदम के साथ ही, नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में न्याय और लोक कल्याण के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री सतीशन ने आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के मानदेय में ₹3,000 मासिक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में ₹1,000 की बढ़ोतरी को मंजूरी दी। इसके अलावा, अपने प्रमुख चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाते हुए कैबिनेट ने 15 जून 2026 से केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा सेवा शुरू करने की घोषणा की है।
कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया, “केरल में सरकारी संरक्षण में होने वाली राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक मनमानी का दौर अब हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है। हमारे द्वारा विशेष जांच दल (SIT) के गठन का निर्णय किसी भी राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह राज्य में कानून के शासन और संवैधानिक व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की एक ईमानदार कोशिश है। लोकतंत्र में हर नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता को बिना किसी डर के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। हमारी सरकार राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर, हिंसा के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति पर काम करेगी।”




