7 views 13 secs 0 comments

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: दरारों के बीच सफर हुआ सस्ता

In Topshoot
April 22, 2026
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे दरारों के बीच सफर हुआ सस्ता - RajneetiGuru.com

अपनी हाई-प्रोफाइल उद्घाटन के एक हफ्ते के भीतर ही, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे इंजीनियरिंग चिंताओं, प्रशासनिक सुधारों और ‘ग्रीन मोबिलिटी’ (हरित गतिशीलता) की एक जटिल चर्चा का केंद्र बन गया है। जहाँ इस 213 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर ने यात्रा के समय को छह घंटे से घटाकर मात्र 2.5 घंटे कर दिया है, वहीं संरचनात्मक कमियों की खबरों ने इस “इंजीनियरिंग के चमत्कार” पर अस्थाई रूप से सवालिया निशान लगा दिया है।

सहारनपुर में संरचनात्मक जांच

विवाद तब शुरू हुआ जब सहारनपुर के गणेशपुर इलाके में स्थानीय यात्रियों ने सुरक्षा दीवार (safety wall) पर बड़ी दरारें देखीं। चूंकि इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 14 अप्रैल, 2026 को किया था, इसलिए ऐसी खामियों के उभरने से निर्माण की गुणवत्ता और गति को लेकर बहस छिड़ गई है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने रिपोर्ट के वायरल होने के कुछ ही घंटों के भीतर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। निर्माण स्थल पर सुरक्षा दीवार को मजबूत करने के लिए भारी-भरकम एंकर प्लेटें लगाते हुए देखा गया।

“हम इसे मुख्य कैरिजवे की संरचनात्मक विफलता के बजाय एक स्थानीय सतह-स्तर की समस्या मान रहे हैं,” NHAI के एक वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने कहा। “हालांकि, हमने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चरण 3 और चरण 4 के पूरे हिस्से का स्वतंत्र ऑडिट कराने का आदेश दिया है।”

यात्रा प्रोत्साहन: किराया कम और इलेक्ट्रिक बसों का वादा

संरचनात्मक चिंताओं के बीच यात्रियों के लिए अच्छी खबर भी आई है। उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) ने एक्सप्रेसवे के माध्यम से चलने वाली बसों के किराए में कटौती की घोषणा की है। इस कटौती से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा करने वाले छात्रों और मध्यम वर्ग के लिए सफर और भी किफायती हो जाएगा।

इसके अलावा, UTC ने राज्य सरकार को दिल्ली-देहरादून मार्ग के लिए विशेष रूप से 25 नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। यह कदम एक्सप्रेसवे के “ग्रीन कॉरिडोर” विजन का हिस्सा है।

“हमारा लक्ष्य दिल्ली-देहरादून यात्रा को न केवल सबसे तेज, बल्कि उत्तर भारत में सबसे पर्यावरण के अनुकूल और किफायती बनाना है,” उत्तराखंड परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। “यात्रा समय में कमी के साथ, हम दैनिक यात्रियों की संख्या में 40% की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।”

ट्रैफिक जाम और बेली ब्रिज का समाधान

यद्यपि एक्सप्रेसवे अधिकांश यात्रा के लिए एक सुगम अनुभव प्रदान करता है, लेकिन “अंतिम मील” (last-mile) कनेक्टिविटी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। मसूरी रोड पर कुठाल गेट के पास एक बड़ा ट्रैफिक जाम देखा जा रहा है। उद्घाटन के बाद पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण, स्थानीय सड़कें एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के दबाव को झेलने में असमर्थ साबित हो रही हैं।

इसे कम करने के लिए, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने कुठाल गेट पर एक बेली ब्रिज (Bailey bridge) के निर्माण में तेजी ला दी है। यह अस्थायी स्टील ढांचा आने वाले सप्ताहांत तक चालू होने की उम्मीद है, जो हल्के वाहनों के लिए बाईपास के रूप में काम करेगा।

उत्तर भारत की एक जीवन रेखा

लगभग ₹12,000 करोड़ की अनुमानित लागत से निर्मित दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा एक चार-चरणीय परियोजना है जो दिल्ली के अक्षरधाम को देहरादून के आशारोड़ी से जोड़ती है।

  • वन्यजीव गलियारा: इसकी सबसे बड़ी विशेषता शिवालिक वन और राजाजी नेशनल पार्क से गुजरने वाला 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन है। इसमें जंगली जानवरों के लिए अंडरपास और ध्वनि अवरोधक लगाए गए हैं।

  • डिजिटल एकीकरण: यह मार्ग अब पूरी तरह से ‘फास्टैग-ओनली’ (FASTag-only) टोलिंग से लैस है और गूगल मैप्स पर भी उपलब्ध है।

  • टोल दरें: कारों के लिए प्रस्तावित टोल लगभग ₹670-₹675 (एक तरफ) है, लेकिन वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बसों को रियायत दी जा रही है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे आधुनिक भारतीय बुनियादी ढांचे की दोहरी प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है—एक तरफ कनेक्टिविटी में एक लंबी छलांग, तो दूसरी तरफ जवाबदेही की चुनौतियां। संरचनात्मक दरारें चिंता का विषय जरूर हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और किराए में कमी की दिशा में उठाए गए कदम क्षेत्र के विकास के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

/ Published posts: 483

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

Instagram