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विजय की TVK का राज्यपाल से मुलाकात, सरकार बनाने का दावा — कांग्रेस का समर्थन

In Politics
May 07, 2026
विजय की TVK का राज्यपाल से मुलाकात, सरकार बनाने का दावा — कांग्रेस का समर्थन - RajneetiGuru.com

तमिलनाडु की राजनीति में आज एक ऐसा अध्याय जुड़ गया है जिसे आने वाली पीढ़ियां एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में याद रखेंगी। ‘थलापति’ विजय के नाम से मशहूर अभिनेता और अब राजनेता बने विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कज़गम’ (TVK) के बैनर तले तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात की और राज्य में अगली सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया।

2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजे किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं रहे। विजय की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में 108 से अधिक सीटें जीतकर न केवल सभी को चौंका दिया, बल्कि पिछले 50 सालों से चले आ रहे DMK और AIADMK के वर्चस्व को भी मटियामेट कर दिया।

50 साल का किला ढहा: एक नए युग का आगाज़

तमिलनाडु की सियासत 1960 के दशक के उत्तरार्ध से ही दो ध्रुवों के बीच घूमती रही है। एक तरफ करुणानिधि और स्टालिन की DMK, तो दूसरी तरफ MGR और जयललिता की AIADMK। इन पांच दशकों में कई क्षेत्रीय दल आए और गए, लेकिन कोई भी इन दो दिग्गजों की दीवार नहीं गिरा सका। हालांकि, 2026 के चुनावों ने इस इजारेदारी (Monopoly) को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। विजय की TVK ने युवाओं के बीच अपनी ज़बरदस्त पकड़, भ्रष्टाचार विरोधी कड़े रुख और ‘सुशासन’ के वादे के दम पर 108+ सीटों पर कब्ज़ा जमाया। यह प्रदर्शन भारतीय चुनावी इतिहास के सबसे सफल डेब्यू में से एक माना जा रहा है। चेन्नई स्थित वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अरुल सेलवन का कहना है, “यह केवल एक जीत नहीं है, बल्कि यह बदलाव के लिए दिया गया एक स्पष्ट जनादेश है। मतदाताओं ने पुराने ढर्रे की राजनीति को नकार दिया है और एक ऐसे नेता को चुना है जो विरासत की राजनीति से अलग एक नई सोच का प्रतिनिधित्व करता है।”

राजभवन में हलचल: आंकड़ों का गणित

बुधवार की शाम को विजय ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के समर्थन का पत्र भी राज्यपाल को सौंपा। वर्तमान में, TVK की अपनी 108 सीटें और कांग्रेस की 5 सीटें मिलाकर यह गठबंधन 113 के आंकड़े पर पहुँच गया है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 का जादुई आंकड़ा चाहिए। पार्टी फिलहाल 5 सीटें कम है, लेकिन सूत्रों की मानें तो CPI (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) और VCK (विदुथलाई चिरुथाइगल काची) के साथ बातचीत अंतिम दौर में है। राज्यपाल ने विजय को अगले सात दिनों के भीतर सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित करने का अवसर दिया है।

राजभवन से बाहर निकलते समय विजय ने मीडिया से संक्षिप्त बात करते हुए कहा, “हमने युवाओं का जुनून और आम नागरिकों की आँखों में उम्मीद देखी है। हमारी सरकार समावेशी, पारदर्शी और कर्मठ होगी।”

कांग्रेस का समर्थन और गठबंधन की शर्तें

इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ कांग्रेस का पाला बदलना रहा। दशकों पुराने साथी DMK का साथ छोड़कर कांग्रेस ने TVK को समर्थन देने का फैसला किया। बदले में, कांग्रेस ने मंत्रिमंडल में दो महत्वपूर्ण पदों की मांग रखी है, जिसमें शिक्षा और वित्त मंत्रालय शामिल हो सकते हैं।

विजय की संभावित कैबिनेट को लेकर बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि उनके मंत्रिमंडल में नए, युवा और उच्च शिक्षित चेहरों को तरजीह दी जाएगी। विजय ने अपने घोषणापत्र में जिन प्रमुख बिंदुओं पर ज़ोर दिया था, उनमें शामिल हैं:

  1. भ्रष्टाचार पर वार: लोकायुक्त को और अधिक शक्तियाँ देना।

  2. युवा रोज़गार: तमिलनाडु के आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सरकारी निवेश बढ़ाना।

  3. कल्याणकारी योजनाओं का डिजिटलीकरण: यह सुनिश्चित करना कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे जनता तक पहुँचे।

पुराने दिग्गजों पर संकट के बादल

TVK की इस सुनामी ने राज्य की दोनों पारंपरिक पार्टियों को गहरे संकट में डाल दिया है:

  • DMK: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ खोना DMK के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

  • AIADMK: जयललिता के बाद से ही आंतरिक कलह से जूझ रही AIADMK इस चुनाव में तीसरे नंबर पर खिसक गई है। पार्टी अब अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता (Relevance) बचाने की लड़ाई लड़ रही है।

एक नई उम्मीद

तमिलनाडु के लाखों युवा मतदाताओं के लिए यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी है। विजय, जिन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से अक्सर सामाजिक मुद्दों को उठाया, अब हकीकत में सत्ता की बागडोर संभालने जा रहे हैं। हालांकि, गठबंधन सरकार चलाना और बहुमत का आंकड़ा जुटाना उनके लिए पहली बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

क्या विजय तमिलनाडु के अगले ‘MGR’ साबित होंगे? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल चेन्नई की सड़कों पर जश्न का माहौल है और बदलाव की बयार साफ महसूस की जा सकती है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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