
भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से बुधवार को जारी वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेट सेक्टर की सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि 9.28 प्रतिशत रही। वहीं, प्रति परिचालन फैक्ट्री शुद्ध मूल्य वर्धन में 6.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में प्रति कार्यरत व्यक्ति GVA में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा, पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र में प्लांट और मशीनरी का सकल मूल्य 7.25 प्रतिशत बढ़ा।
मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेट सेक्टर का प्रदर्शन मजबूत
ASI के आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेट सेक्टर का कुल GVA में 89 प्रतिशत से अधिक योगदान रहा। इस क्षेत्र में परिचालन करने वाली फैक्ट्रियों की संख्या में 3.45 प्रतिशत और कार्यरत लोगों की संख्या में 7.57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मंत्रालय ने ASI फैक्टशीट 30 सितंबर को जारी करने के बाद अब वॉल्यूम-I और फैक्ट्री सेक्टर के सारांश परिणाम प्रकाशित किए हैं। इसके साथ ही यूनिट-स्तरीय डेटा और मेटाडेटा भी उपलब्ध कराया गया है।
यह सर्वेक्षण अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक के वित्त वर्ष को कवर करता है। इसके लिए फील्डवर्क अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच किया गया था।
पांच प्रमुख उद्योगों में 41% से अधिक रोजगार
सर्वेक्षण के अनुसार, खाद्य उत्पाद, टेक्सटाइल, बेसिक मेटल, मोटर वाहन और रेडीमेड कपड़ों से जुड़े उद्योगों में कुल विनिर्माण रोजगार का 41 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शामिल रहा।
राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश GVA के मामले में शीर्ष पांच स्थानों पर रहे। इन पांच राज्यों का कुल विनिर्माण GVA में 54 प्रतिशत से अधिक योगदान रहा।
बड़ी फैक्ट्रियों के पास पूंजी और उत्पादन का बड़ा हिस्सा
ASI के आंकड़े बताते हैं कि विनिर्माण क्षेत्र में पूंजी, उत्पादन और मूल्य वर्धन का बड़ा हिस्सा बड़ी फैक्ट्रियों के पास केंद्रित है।
5 करोड़ रुपये तक के प्लांट और मशीनरी निवेश वाली इकाइयां कुल परिचालन फैक्ट्रियों का 78.69 प्रतिशत थीं। इन इकाइयों में 34.32 प्रतिशत लोग कार्यरत थे। हालांकि, इनका स्थायी पूंजी में हिस्सा 10.55 प्रतिशत, कुल उत्पादन में 19.24 प्रतिशत और शुद्ध मूल्य वर्धन में 17.61 प्रतिशत रहा।
इसके विपरीत, 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक के निवेश वाली फैक्ट्रियां कुल परिचालन इकाइयों का 15.84 प्रतिशत थीं। इन इकाइयों के पास कुल स्थायी पूंजी का 87.42 प्रतिशत हिस्सा था। वहीं, रोजगार में इनका योगदान 59.66 प्रतिशत, उत्पादन में 76.82 प्रतिशत और शुद्ध मूल्य वर्धन में 78.07 प्रतिशत रहा।
सालाना 10 करोड़ से अधिक उत्पादन वाली फैक्ट्रियों का दबदबा
उत्पादन के आधार पर किए गए वर्गीकरण में भी बड़ी इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई। सालाना 10 करोड़ रुपये से अधिक उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियां कुल परिचालन इकाइयों का 47.63 प्रतिशत थीं।
इन फैक्ट्रियों के पास कुल स्थायी पूंजी का 95.55 प्रतिशत हिस्सा था। इसके अलावा, रोजगार में 88.78 प्रतिशत, उत्पादन में 98.10 प्रतिशत और शुद्ध मूल्य वर्धन में 97.87 प्रतिशत योगदान इन्हीं इकाइयों का रहा।
वहीं, सालाना एक करोड़ रुपये तक उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियां कुल परिचालन इकाइयों का 18.34 प्रतिशत थीं। इनमें केवल 2.17 प्रतिशत लोग कार्यरत थे और कुल उत्पादन में इनका योगदान 0.08 प्रतिशत रहा।
उद्योगों की स्थिति समझने में ASI की अहम भूमिका
वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण उद्योगों की संरचना, विकास और उनमें हो रहे बदलावों का आकलन करता है। इसके तहत उत्पादन, मूल्य वर्धन, रोजगार, पूंजी निवेश और कर्मचारियों के पारिश्रमिक जैसे प्रमुख संकेतकों का अध्ययन किया जाता है।
सर्वेक्षण के निष्कर्ष राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आय के अनुमानों को तैयार करने में भी उपयोगी होते हैं। वॉल्यूम-I में फैक्ट्री सेक्टर के विस्तृत आंकड़े दिए गए हैं, जबकि सारांश रिपोर्ट में रोजगार का आकार, पूंजी निवेश, उत्पादन और शुद्ध मूल्य वर्धन जैसी जानकारियां शामिल हैं।
इस सर्वेक्षण में पंजीकृत फैक्ट्रियों, बीड़ी और सिगार प्रतिष्ठानों, कुछ बिजली उपक्रमों तथा राज्य व्यापार रजिस्टर में शामिल कम से कम 100 कर्मचारियों वाले पात्र प्रतिष्ठानों को शामिल किया जाता है। आंकड़े एक विशेष वेब पोर्टल के माध्यम से प्रतिष्ठान-आधारित प्रक्रिया के तहत जुटाए जाते हैं।
मंत्रालय के अनुसार, सर्वेक्षण की रिपोर्ट, प्रकाशन और यूनिट-स्तरीय डेटा उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।




