
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के गैर-कृषि आजीविका घटक के तहत महिला-led ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने की दिशा में प्रस्तावों की समीक्षा की है। नई दिल्ली में हुई सशक्त समिति की बैठक में छोटे स्तर पर चल रहे स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाकर अधिक विकसित और विकास केंद्रित कारोबार में बदलने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की। इसमें ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता आधारित आजीविका के अवसरों को तेज करने और केंद्र सरकार के 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
समिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए उद्यमों को आवश्यक सहयोग और विस्तार का रास्ता उपलब्ध कराने पर विचार किया। इसके तहत छोटे स्वयं सहायता समूह कारोबार को ऐसे व्यवसायों में विकसित करने की दिशा पर चर्चा हुई, जिनमें आगे बढ़ने और अधिक रोजगार तथा आय पैदा करने की क्षमता हो।
बैठक में गैर-कृषि आजीविका क्षेत्र से जुड़े चार नए इनक्यूबेटर प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। ये प्रस्ताव बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और गुजरात से आए हैं। इनके लिए क्रमशः आईआईटी पटना, आईआईएम जम्मू, आईआईएम लखनऊ और आईआईटी गांधीनगर को प्रस्तावित इनक्यूबेटर साझेदार के रूप में शामिल किया गया है।
इन संस्थानों की भागीदारी से ग्रामीण महिला उद्यमियों को कारोबार विकसित करने, नए अवसर तलाशने और छोटे स्तर के उद्यमों को विस्तार देने में संस्थागत सहयोग मिलने की उम्मीद है। बैठक का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण आजीविका के पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना और उनके व्यवसायों को टिकाऊ बनाने के लिए बेहतर मार्ग तैयार करना रहा।
डीएवाई-एनआरएलएम के गैर-कृषि आजीविका घटक के तहत यह पहल ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबार को अधिक संगठित और विकासोन्मुख बनाने पर केंद्रित है। सरकार का लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय और आर्थिक क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें बड़े बाजारों और बेहतर कारोबारी अवसरों से जोड़ना है।
बैठक में लिए गए प्रस्तावों और चर्चा को ग्रामीण महिला उद्यमिता को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इनक्यूबेटर संस्थानों के साथ साझेदारी से छोटे उद्यमों को आगे बढ़ाने और अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।




