
आंध्र प्रदेश में इस वर्ष कमजोर मानसून और एल नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा में भारी कमी दर्ज की गई है। राज्य के सिंचाई विभाग ने बताया कि कम बारिश की वजह से कृष्णा नदी में जल प्रवाह भी काफी घट गया है। मौजूदा हालात को देखते हुए विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फिलहाल धान की खेती से बचें और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में संभावित नुकसान से बचा जा सके।
विजयवाड़ा में आयोजित एक प्रेस वार्ता में आंध्र प्रदेश सिंचाई विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ के. नरसिम्हामूर्ति ने कहा कि राज्य में अब तक सामान्य से 51 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं, कृष्णा डेल्टा क्षेत्र में वर्षा सामान्य से 49 प्रतिशत कम रही है। उन्होंने बताया कि लगातार कम बारिश के कारण राज्य के प्रमुख जलाशयों में जल उपलब्धता भी प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में स्थित अलमट्टी, नारायणपुर और तुंगभद्रा जलाशयों में भी जल भंडारण सामान्य से कम है। इन जलाशयों के पर्याप्त रूप से भरने के बाद ही श्रीशैलम जलाशय तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच सकेगा। ऐसे में फिलहाल जल संसाधनों का अत्यंत सावधानी से प्रबंधन किया जा रहा है।
इंजीनियर-इन-चीफ ने बताया कि राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना है। उपलब्ध जल संसाधनों का इस तरह उपयोग किया जा रहा है कि गांवों, कस्बों और नगरपालिकाओं में जून 2027 तक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार जल संरक्षण और जल वितरण की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
किसानों को संबोधित करते हुए नरसिम्हामूर्ति ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में धान जैसी अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसल की बुवाई जोखिम भरी हो सकती है। यदि फसल के विकास के दौरान पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हुआ तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए किसानों को ऐसी फसलें अपनाने की सलाह दी गई है जिनमें पानी की खपत कम होती है और जो मौजूदा परिस्थितियों में बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार जलाशयों में पानी की आवक पर लगातार निगरानी रख रही है। यदि आने वाले दिनों में श्रीशैलम और नागार्जुन सागर जलाशयों में पर्याप्त जल प्रवाह होता है, तो स्थिति की समीक्षा कर किसानों के हित में आगे की रणनीति और आवश्यक निर्णय घोषित किए जाएंगे।
सिंचाई विभाग ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और फसल चयन में सावधानी बरतना ही किसानों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। सरकार ने किसानों से मौसम और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए कृषि संबंधी निर्णय लेने तथा विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।




