
‘ड्रग-फ्री गुजरात’ अभियान को मिलेगा बल, हर जिले में 15-बेड की विशेष सुविधा होगी उपलब्ध
गांधीनगर, 23 जुलाई: गुजरात सरकार ने राज्य के सभी 34 जिला अस्पतालों में 15-बेड वाले नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए ₹14.90 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह स्वीकृति दी गई है। इस पहल का उद्देश्य राज्यभर में नशा मुक्ति उपचार और पुनर्वास सेवाओं को सुलभ बनाना है।
हर जिले में मिलेगी उपचार और पुनर्वास की सुविधा
सरकार के अनुसार, प्रत्येक जिला अस्पताल में स्थापित होने वाले नशा मुक्ति केंद्रों में वैज्ञानिक तरीके से डिटॉक्सिफिकेशन, नशा मुक्ति उपचार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक परामर्श और पुनर्वास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन केंद्रों में इनडोर (IPD) और आउटडोर (OPD) दोनों प्रकार की सेवाएं उपलब्ध होंगी, ताकि मरीजों को अपने ही जिले में समग्र उपचार मिल सके और बड़े शहरों तक जाने की आवश्यकता न पड़े।
विशेषज्ञों की टीम करेगी समग्र इलाज
सरकार ने बताया कि प्रत्येक केंद्र में डॉक्टर, नर्स, मनोवैज्ञानिक, काउंसलर और अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की बहु-विषयक टीम तैनात की जाएगी। यह टीम चिकित्सा उपचार के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता और पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध कराएगी। सरकार का मानना है कि समय पर उपचार और परामर्श से नशे की लत से जूझ रहे लोगों को सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिलेगा और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक एवं मानसिक बोझ भी कम होगा।
GeM पोर्टल से होगी खरीद, निगरानी भी सख्त
परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपकरणों और सामग्री की खरीद Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इसके अलावा परियोजना की नियमित निगरानी, सामाजिक ऑडिट और थर्ड-पार्टी सत्यापन भी कराया जाएगा, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ पुनर्वास पर भी जोर
राज्य सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का कहना है कि सभी जिला अस्पतालों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित होने से उपचार और परामर्श सेवाएं अधिक लोगों तक पहुंचेंगी तथा राज्य के ‘ड्रग-फ्री गुजरात’ लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।




