
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने उज्बेकिस्तान में केरल की 21 वर्षीय मेडिकल छात्रा की कथित यातना और हत्या के मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। आयोग ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि छात्रा की मौत से पहले उसके साथ कथित तौर पर शारीरिक हमला, उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का प्रयास किए जाने के आरोप बेहद चिंताजनक हैं। आयोग ने मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
एनसीडब्ल्यू ने इस संबंध में केरल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर मामले की जल्द जांच कराने का आग्रह किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि जांच के दौरान सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और पूरे मामले में विदेश मंत्रालय तथा उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। आयोग ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को हरसंभव कानूनी, प्रशासनिक और मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आयोग ने केरल पुलिस से इस मामले में सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) प्रस्तुत करने को कहा है। एनसीडब्ल्यू का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े इस संवेदनशील मामले में समयबद्ध जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय बेहद आवश्यक है, ताकि सभी तथ्यों का जल्द खुलासा हो सके।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत को भी पत्र लिखकर मामले में सक्रिय सहयोग देने का अनुरोध किया है। आयोग ने भारतीय दूतावास से स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने तथा कानूनी प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही पीड़ित परिवार को हरसंभव राजनयिक सहयोग देने पर भी जोर दिया गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा उज्बेकिस्तान में मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रही थी। उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद परिवार ने शारीरिक प्रताड़ना, उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन्हीं आरोपों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के बीच प्रभावी समन्वय से जांच प्रक्रिया तेज होती है और पीड़ित परिवार को समय पर सहायता मिलती है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। आयोग ने उम्मीद जताई कि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। साथ ही विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

