
पारा 45 डिग्री पहुंचने से जनजीवन बेहाल, बिजली की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और पूरे उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) का प्रकोप अपने चरम पर पहुंच गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी करते हुए चेतावनी दी है कि इस सप्ताह तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस (45%) के खतरनाक स्तर को छू सकता है। राजस्थान और उसके आस-पास के शुष्क इलाकों से आ रही गर्म पछुआ हवाओं के कारण दिल्ली का आसमान भट्टी की तरह तप रहा है, जिसने आम नागरिकों के स्वास्थ्य और शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आसमान पूरी तरह साफ होने और तेज धूप के कारण आगामी चार-पांच दिनों तक इस तपिश से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। कंक्रीट के अत्यधिक निर्माण के कारण दिल्ली के शहरी इलाके ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (Urban Heat Island) में तब्दील हो चुके हैं, जिसके कारण रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है और वातावरण ठंडा नहीं हो पा रहा है।
चरमराई बिजली व्यवस्था: मांग 9,000 मेगावाट के पार जाने का अनुमान
इस भीषण गर्मी का सीधा असर दिल्ली की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है। चिलचिलाती धूप और उमस से बचने के लिए घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) और कूलरों का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे बिजली की खपत ने इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
राज्य ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग 9,000 मेगावाट (MW) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर सकती है, जो पिछले साल की अधिकतम मांग (8,442 मेगावाट) से काफी अधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर भी देश की कुल बिजली मांग 252.07 गीगावाट (GW) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। इस भारी लोड को संभालने के लिए दिल्ली की सभी बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को हाई अलर्ट पर रखा गया है और तकनीकी खराबी को तुरंत ठीक करने के लिए क्विक रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं।
स्वास्थ्य पर गंभीर संकट: अस्पतालों में बने ‘कूल रूम’
45 डिग्री से अधिक तापमान में लगातार रहने से मानव शरीर पर इसका बेहद घातक प्रभाव पड़ता है। दिल्ली के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों के आपातकालीन विभागों (ER) में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), अत्यधिक थकान, चक्कर आना और हीटस्ट्रोक (लू लगना) के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। बाहर काम करने वाले मजदूर, बूढ़े और छोटे बच्चे इस मौसमी संकट के सबसे आसान शिकार बन रहे हैं।
इस स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी 13 जिलों के 339 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। इसके साथ ही, 30 से अधिक बड़े अस्पतालों में विशेष रूप से पांच बिस्तरों वाले ‘कूल रूम’ (Cool Rooms) तैयार किए गए हैं, जहां हीटस्ट्रोक के गंभीर मरीजों को तुरंत ठंडा वातावरण, जीवन रक्षक दवाएं, बर्फ की पट्टियां और ओआरएस (ORS) का घोल देकर उनकी स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
सरकारी कार्ययोजना और प्रशासनिक कड़े निर्देश
बढ़ते संकट को देखते हुए दिल्ली प्रशासन ने अपने ‘हीट वेव एक्शन प्लान 2026’ को जमीन पर सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। सरकार का मुख्य ध्यान अयानगर, नजफगढ़, वजीरपुर और जहांगीरपुरी जैसे अत्यधिक संवेदनशील और गर्म इलाकों (Hotspots) पर है, जहां सैटेलाइट डेटा के अनुसार तापमान सबसे ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।
प्रशासनिक तैयारियों और नागरिक सुरक्षा को रेखांकित करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, “दिल्ली में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव को देखते हुए, हमने सभी बिजली कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों और जल उपचार संयंत्रों (WTPs) जैसी आवश्यक सेवाओं में 24 घंटे बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस दौरान किसी भी प्रकार की अघोषित बिजली कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच खुले में काम करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हमारा प्रयास है कि किसी भी नागरिक को इस आपदा में प्रशासनिक लापरवाही का सामना न करना पड़े, इसलिए सभी बस स्टॉप और प्रमुख चौराहों पर ठंडे पानी और ओआरएस की व्यवस्था की जा रही है।”
जनहित में स्वास्थ्य एडवाइजरी: लू से बचाव के मुख्य उपाय
मौसम विभाग और डॉक्टरों के पैनल ने संयुक्त रूप से नागरिकों के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, ताकि लोग खुद को इस जानलेवा गर्मी से सुरक्षित रख सकें:
लगातार जलसेवन (हाइड्रेशन): प्यास न लगने पर भी दिन भर लगातार पानी पीते रहें। शरीर में लवणों और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बनाए रखने के लिए छाछ, नींबू पानी, नारियल पानी और ओआरएस (ORS) के घोल का नियमित सेवन करें।
पीक ऑवर्स में बाहर जाने से बचें: दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें सबसे तीखी और हानिकारक होती हैं, बिना किसी जरूरी काम के घर से बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करें।
सही पहनावा और सुरक्षा: बाहर निकलते समय हमेशा ढीले, हल्के रंग के सूती (कॉटन) कपड़े पहनें। धूप से सीधे बचाव के लिए छाते, चौड़े किनारे वाली टोपी, चश्मे (सनग्लासेस) का उपयोग करें और नंगे पैर बाहर न जाएं।




