
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम पर है। रविवार को पूर्व वर्द्धमान के खंडघोष में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर रविवार रात से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं की “बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और हिरासत” की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से “दिमाग का इस्तेमाल” करने और “सतर्क रहने” की अपील की। राज्य में दो चरणों में मतदान होना है—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल, 2026 को।
“15-21 दिनों की बात है, फिर हम देखेंगे”
ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, “भाजपा जानती है कि वह चुनाव हार रही है, इसलिए वह डराने-धमकाने की राजनीति कर रही है। अभी सब कुछ चुनाव आयोग (EC) के हाथ में है, हमारे पास नहीं। अगले 15-21 दिनों तक सतर्क रहें; उसके बाद हम फिर से जीतेंगे और भाजपा से पूछेंगे कि हारना कैसा लगता है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रैली की अनुमति देने में देरी की गई, जबकि प्रधानमंत्री की सभाओं को तुरंत हरी झंडी मिल जाती है।
परिसीमन (Delimitation) पर बड़ा आरोप
ममता ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले परिसीमन विधेयक को “बंगाल को तोड़ने की साजिश” बताया। उन्होंने कहा, “वे परिसीमन के जरिए बंगाल को तीन हिस्सों में बांटना चाहते हैं और हमारे कुछ जिलों को बिहार और ओडिशा में मिलाना चाहते हैं। इसके बाद एनआरसी (NRC) लागू कर लोगों को डिटेंशन कैंप में भेजा जाएगा। हमने असम में जो देखा, उसे बंगाल में कभी होने नहीं देंगे।”
वोटर लिस्ट में “महाघोटाला”
निर्वाचन नामावली के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) को मुख्यमंत्री ने “देश का सबसे बड़ा घोटाला” करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या 2024 में मतदान करने वाले सभी लोग अब ‘घुसपैठिए’ हो गए हैं? गौरतलब है कि हालिया आंकड़ों के अनुसार, बंगाल की वोटर लिस्ट से लगभग 91 लाख नाम हटाए गए हैं, जिसे लेकर टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
महिलाओं के साथ “अभद्र” व्यवहार का मुद्दा
सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाओं के बैग की तलाशी लेना और उनके निजी सामान को बाहर निकालना अपमानजनक है। अभिनेता कंचन मुल्लिक की पत्नी के साथ भी कल ऐसा ही हुआ। हम ऐसी अभद्रता बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, बंगाल में ‘खेला होबे’ का नारा एक बार फिर गूंज रहा है। ममता बनर्जी की “चेतावनी” और “सतर्कता” का आह्वान यह साफ करता है कि आने वाले दो हफ्ते बंगाल की राजनीति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।




