चंडीगढ़ – हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए बेहद रोमांचक और विवादित चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध को निर्वाचित घोषित किया गया है। सोमवार रात से शुरू हुआ वोटों की गोपनीयता और क्रॉस-वोटिंग का ड्रामा मंगलवार सुबह नतीजों की घोषणा के साथ समाप्त हुआ। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों नेताओं को बधाई दी। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, कुल पांच वोट अवैध घोषित किए गए, जिनमें चार कांग्रेस के और एक भाजपा का था।
मतदान का गणित और उम्मीदवारों का प्रदर्शन
इन दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में थे: भाजपा के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में जीत के लिए आवश्यक आंकड़ों के बावजूद, क्रॉस-वोटिंग की आशंका ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था। मुख्यमंत्री सैनी ने दावा किया कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की, जिसके कारण कांग्रेस के चार वोट रद्द हो गए।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई
कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी महासचिव बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी उन विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी जिन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, “भाजपा ने कई हथकंडे अपनाए, लेकिन कांग्रेस ‘अग्निपरीक्षा’ में सफल रही और अपनी सीट बचाने में कामयाब रही। जिन लोगों ने क्रॉस-वोटिंग की है, जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।”
नवनिर्वाचित सदस्यों का परिचय
- संजय भाटिया (भाजपा): करनाल के पूर्व सांसद संजय भाटिया को संगठन में उनकी पकड़ के लिए जाना जाता है। उनकी जीत से भाजपा ने उच्च सदन में अपना प्रतिनिधित्व बरकरार रखा है।
- करमवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस): एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी और दलित अधिकारों के पैरोकार, बौद्ध की जीत को कांग्रेस के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए विभिन्न मंचों पर आवाज उठाई है।
निष्कर्ष
यह चुनाव हरियाणा की राजनीति में बढ़ते दलबदल और गुटबाजी को दर्शाता है। जहां भाजपा ने अपनी रणनीतिक पकड़ दिखाई, वहीं कांग्रेस ने अपनी सीट बचाकर यह साबित किया कि वह अभी भी डटी हुई है। हालांकि, अवैध वोटों और विश्वासघात के आरोपों ने आने वाले समय में कांग्रेस के भीतर बड़े संगठनात्मक फेरबदल के संकेत दिए हैं।
