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मणिपुर विधायक वाल्टे की अंतिम यात्रा

In Politics
February 26, 2026
rajneetiguru.com - मणिपुर विधायक वाल्टे की अंतिम यात्रा। Image Credit – The Indian Express

मणिपुर के थानलोन विधानसभा क्षेत्र से विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे की अंतिम यात्रा फिलहाल अपने अंतिम पड़ाव तक नहीं पहुंच सकी है। उनका पार्थिव शरीर चुराचांदपुर ज़िले के सरकारी अस्पताल के जिला मोर्चरी में रखा गया है, जबकि अंतिम संस्कार को लेकर अंतिम निर्णय आदिवासी संगठन Zomi Council द्वारा संबंधित संगठनों और परिवार से परामर्श के बाद लिया जाना है। यह स्थिति केवल एक विधायक के निधन तक सीमित नहीं है, बल्कि मणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक और प्रशासनिक असंतोष की पृष्ठभूमि में एक व्यापक अर्थ ग्रहण कर चुकी है।

वाल्टे का निधन गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां वे मई 2023 में इंफाल में हुई हिंसा के दौरान भीड़ द्वारा किए गए हमले के बाद गंभीर रूप से घायल होने के कारण लंबे समय से उपचाराधीन थे। उस हमले ने पूरे देश का ध्यान मणिपुर में व्याप्त जातीय तनाव और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों की ओर खींचा था। वाल्टे उस समय सार्वजनिक कार्यक्रम से लौट रहे थे, जब उन पर हमला हुआ। इसके बाद से वे पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके।

उनके पार्थिव शरीर को हाल ही में उनके निवास से चुराचांदपुर जिला अस्पताल की मोर्चरी में स्थानांतरित किया गया। परिवार ने पोस्टमार्टम और औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए समय मांगा है। परिजनों का कहना है कि वे चाहते हैं कि मौत से जुड़ी परिस्थितियों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो और भविष्य में किसी भी जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रहें।

इस बीच, Zomi Council ने स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार से पहले वह सभी संबंधित “फ्रंटल संगठनों” से परामर्श करेगा। परिषद का कहना है कि वाल्टे न केवल एक निर्वाचित प्रतिनिधि थे, बल्कि पूरे समुदाय की राजनीतिक आवाज भी थे। परिषद के एक पदाधिकारी ने कहा, “हम अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन उससे पहले सरकार से अपेक्षा है कि वह हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर गंभीरता दिखाए।”

परिषद ने एक बार फिर अलग प्रशासन की मांग को दोहराते हुए कहा कि सरकार को इस विषय पर “अपनी गति बढ़ानी चाहिए।” उनके अनुसार, यदि एक निर्वाचित विधायक भी हिंसा का शिकार हो सकता है और उसे समय पर न्याय नहीं मिलता, तो यह समुदाय की सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। परिषद का मानना है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील निर्णय को भी समुदाय की सामूहिक भावना और राजनीतिक संदर्भ से अलग नहीं देखा जा सकता।

वाल्टे के पार्थिव शरीर के साथ निकाली गई श्रद्धांजलि यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़े। उनके निर्वाचन क्षेत्र के गांवों से गुजरते हुए लोगों ने सड़क किनारे खड़े होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई स्थानों पर मौन रखा गया और स्थानीय समुदायों ने पारंपरिक तरीकों से सम्मान व्यक्त किया।

राज्य प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों ने परिवार से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की है और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया है। हालांकि, अंतिम संस्कार की तारीख और स्थान को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि वह परिषद और परिवार के निर्णय का सम्मान करेगा।

वाल्टे के राजनीतिक जीवन की बात करें तो वे एक अनुभवी नेता थे। उन्होंने अपने क्षेत्र में सड़क, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। समय के साथ उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक भूमिकाएं निभाईं और अंततः सत्तारूढ़ दल का प्रतिनिधित्व करते हुए विधानसभा पहुंचे। उनके समर्थकों का कहना है कि वे जमीनी स्तर से जुड़े नेता थे, जिनकी पकड़ अपने क्षेत्र में मजबूत थी।

विश्लेषकों का मानना है कि वाल्टे का निधन मणिपुर की राजनीति में एक प्रतीकात्मक मोड़ बन सकता है। एक ओर यह घटना राज्य में सुरक्षा और विश्वास के संकट को रेखांकित करती है, वहीं दूसरी ओर यह अलग प्रशासन जैसी मांगों को और बल दे सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस संवेदनशील परिस्थिति को कैसे संभालती है और क्या समुदायों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।

फिलहाल, वाल्टे की अंतिम यात्रा अधूरी है। अंतिम संस्कार का निर्णय केवल एक पारिवारिक या धार्मिक प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह मणिपुर के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक हालात का प्रतिबिंब बन चुका है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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