मुंबई – मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के राजनीतिक परिदृश्य को बदलते हुए, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन अब ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर नगर निगमों में अपने महापौर बैठाने के लिए तैयार है। 15 जनवरी, 2026 को हुए महत्वपूर्ण निकाय चुनावों के बाद, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पुष्टि की है कि गठबंधन ने निर्णायक जनादेश हासिल किया है, जिससे इन प्रमुख शहरी निकायों के नेतृत्व पर बना सस्पेंस खत्म हो गया है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राजनीतिक उठापटक अपने चरम पर है। एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के पांच पार्षदों ने कल्याण-डोंबिवली में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अपना समर्थन दे दिया है। इस कदम ने न केवल महायुति की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को भी बड़ा झटका दिया है।
आंकड़ों का गणित: एमएमआर में महायुति का दबदबा
जनवरी 2026 के निकाय चुनाव महायुति (भाजपा, शिवसेना-शिंदे और राकांपा-अजीत पवार) के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुए हैं। गठबंधन ने तीनों क्षेत्रों में बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया है।
1. ठाणे नगर निगम (TMC)
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे में, शिवसेना ने 75 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। सहयोगी भाजपा ने 28 सीटें जीतीं। कुल 103 सीटों के साथ, गठबंधन बहुमत के 66 के आंकड़े से बहुत आगे है।
2. कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC)
122 सदस्यीय केडीएमसी में शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भाजपा 50 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। 5 मनसे पार्षदों के समर्थन के साथ, गठबंधन की ताकत अब 108 हो गई है, जो 62 के बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक है।
3. उल्हासनगर नगर निगम (UMC)
उल्हासनगर में भाजपा और शिवसेना ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा था, लेकिन अब वे महायुति प्रशासन बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। भाजपा ने 37 सीटें और शिवसेना ने 36 सीटें जीतीं। शिवसेना ने बाद में वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के दो पार्षदों और एक निर्दलीय का समर्थन हासिल कर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
रणनीतिक बदलाव और “दावोस फैक्टर”
महापौर पद के उम्मीदवारों का औपचारिक चयन अभी रुका हुआ है। रवींद्र चव्हाण ने कहा कि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा लिया जाएगा।
चव्हाण ने बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “जनता ने इन तीनों नगर निगमों में महायुति को स्पष्ट जनादेश दिया है। महापौर पदों के वितरण को लेकर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। मुख्यमंत्री फडणवीस के दावोस दौरे से लौटने के बाद मुंबई में एक अंतिम संयुक्त बैठक होगी।”
मनसे का शिंदे गुट को समर्थन देना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। मनसे नेता राजू पाटिल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय “विकास कार्यों” के लिए लिया गया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह उद्धव ठाकरे के गुट को स्थानीय सत्ता से बाहर रखने की एक सोची-समझी चाल है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
महायुति भले ही अपनी जीत का जश्न मना रही हो, लेकिन अंदरूनी “पॉवर गेम” अभी शुरू होना बाकी है। केडीएमसी में महापौर की कुर्सी के लिए भाजपा और शिवसेना दोनों के पास मजबूत दावेदार हैं। भाजपा से दीपेश म्हात्रे और शिवसेना से निलेश शिंदे के नाम चर्चा में हैं।
ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) का महापौर बनना लगभग तय है, जबकि उल्हासनगर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते शीर्ष पद पर दावा कर सकती है। आने वाले दिनों में मुंबई में होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि महाराष्ट्र के इन औद्योगिक और आवासीय केंद्रों की कमान किसके हाथ में होगी।
