लखनऊ — उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा करने वाले एक नाटकीय घटनाक्रम में, समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव से तलाक लेने की घोषणा की है। सोमवार को एक विस्फोटक और बेहद निजी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की गई इस घोषणा ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल विवाह के कड़वे अंत का संकेत दिया है, जो कभी राज्य के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवार और कुलीन वर्ग के बीच की कड़ी माना जाता था।
यह रहस्योद्घाटन ऐसे समय में हुआ है जब अपर्णा यादव, जिन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था, सत्ताधारी दल में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत अपर्णा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं संभवतः यादव परिवार के भीतर घरेलू कलह का मुख्य कारण बन गई हैं।
‘एक बुरी आत्मा’: विस्फोटक आरोप
लीड्स यूनिवर्सिटी से एमबीए और फिटनेस उद्यमी प्रतीक यादव, जो सक्रिय राजनीति से दूर रहते आए हैं, ने सोमवार को अपने सत्यापित इंस्टाग्राम हैंडल पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने अपर्णा पर “स्वार्थी” होने और “परिवार तोड़ने” जैसे गंभीर आरोप लगाए।
प्रतीक ने लिखा, “मैं इस स्वार्थी महिला को जल्द से जल्द तलाक देने जा रहा हूं। उसने मेरे पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया। वह केवल प्रसिद्ध और प्रभावशाली बनना चाहती है। अभी मेरी मानसिक स्थिति बहुत खराब है और उसे इसकी कोई परवाह नहीं है, क्योंकि उसे सिर्फ अपनी चिंता है। मैंने इतनी बुरी आत्मा कभी नहीं देखी और मेरा उनसे शादी करना दुर्भाग्यपूर्ण था।”
अपर्णा की तस्वीर के साथ साझा की गई इस पोस्ट ने एक ऐसे वैवाहिक रिश्ते की तस्वीर पेश की जो राजनीतिक महत्वाकांक्षा और व्यक्तिगत उपेक्षा के बोझ तले दब गया था।
दशक पुराना प्रेम संबंध और वैवाहिक विवाद
इस अलगाव के साथ ही लगभग ढाई दशक पुराने रिश्ते का अंत होता दिख रहा है। प्रतीक और अपर्णा की कहानी 2001 में स्कूली दिनों से शुरू हुई थी। खबरों के मुताबिक, शादी के बंधन में बंधने से पहले वे करीब दस साल तक रिलेशनशिप में थे।
2011 के अंत में दोनों की सगाई हुई और फरवरी 2012 में सैफई में उनकी भव्य शादी हुई। इस शादी में बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और उद्योगपति अनिल अंबानी जैसी हस्तियां शामिल हुई थीं। उस समय इस विवाह को पारंपरिक राजनीतिक शक्ति और आधुनिक सोच के मिलन के रूप में देखा गया था।
हालांकि, राजनीतिक विचारधाराओं में अलगाव के साथ ही रिश्तों में खटास आने लगी। जहां प्रतीक अपने रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस में व्यस्त रहे, वहीं अपर्णा की राजनीतिक सक्रियता बढ़ती गई।
अपर्णा का राजनीतिक सफर और ‘हैकिंग’ का दावा
अपर्णा यादव ने पहली बार 2017 में लखनऊ कैंट सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद के वर्षों में उनके बयान भाजपा की विचारधारा की ओर झुकते गए और जनवरी 2022 में वह औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गईं।
सितंबर 2024 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। जैसे ही तलाक की पोस्ट वायरल हुई, अपर्णा के करीबियों ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि प्रतीक का इंस्टाग्राम अकाउंट “हैक” हो गया होगा। हालांकि, अभी तक प्रतीक की ओर से इस पर कोई सफाई नहीं आई है।
विशेषज्ञ विश्लेषण: राजनीतिक मतभेद की कीमत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दरार उस दबाव को दर्शाती है जो एक ही परिवार के सदस्यों के अलग-अलग राजनीतिक खेमों में होने से पैदा होता है। लखनऊ के राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सुधीर पंवार ने कहा:
“यादव जैसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में, निजी जीवन अक्सर सार्वजनिक छवि से जुड़ा होता है। हालांकि परिवार ने वर्षों तक अपर्णा के भाजपा में जाने को सहन किया, लेकिन प्रतीक के सार्वजनिक गुस्से से पता चलता है कि वैचारिक दूरी आखिरकार व्यक्तिगत शून्य में बदल गई। इस परिवार के सदस्यों का सार्वजनिक रूप से इस तरह नाराजगी जाहिर करना बहुत दुर्लभ है।”
यादव परिवार की दो शाखाएं
इस तलाक के महत्व को समझने के लिए पारिवारिक इतिहास पर गौर करना जरूरी है। प्रतीक मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे हैं। उनके सौतेले भाई अखिलेश यादव सपा के प्रमुख हैं। 2022 में मुलायम सिंह और साधना गुप्ता के निधन के बाद परिवार की दोनों शाखाओं के बीच की कड़ी कमजोर होती गई।
यदि प्रतीक के दावे के अनुसार जल्द ही तलाक की अर्जी दाखिल की जाती है, तो यह राज्य के इतिहास की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में से एक होगी।
