पटना — बिहार की राजनीति में उस समय तीखी बहस शुरू हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। वीडियो में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान एक महिला डॉक्टर के हिजाब को लेकर की गई उनकी कथित टिप्पणी और शारीरिक हावभाव पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस घटना के बाद विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे महिला गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
यह घटना राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां नव-नियुक्त महिला डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपे जा रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। विपक्ष ने मुख्यमंत्री के व्यवहार को अनुचित बताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की, जबकि सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
इस पूरे विवाद के बीच सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने मुख्यमंत्री का बचाव किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक वीडियो क्लिप के आधार पर वर्षों के कार्यकाल और नीतिगत फैसलों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। JDU का तर्क है कि नीतीश कुमार का प्रशासनिक रिकॉर्ड महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय रहा है।
JDU के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,
“मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को किसी एक घटना से नहीं, बल्कि उनके 15 वर्षों से अधिक के शासन में महिलाओं के लिए किए गए कार्यों से आंका जाना चाहिए। शराबबंदी, लड़कियों की शिक्षा, साइकिल और पोशाक योजना जैसी पहलें उनके महिला-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।”
वहीं, विवाद के केंद्र में आई महिला डॉक्टर को लेकर भी कई तरह की अटकलें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला डॉक्टर ने घटना के बाद ड्यूटी जॉइन करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, बिहार स्वास्थ्य विभाग ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर की ओर से अब तक किसी प्रकार का लिखित या मौखिक इनकार दर्ज नहीं कराया गया है और वह नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई हैं।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही सूचनाएं भ्रामक हैं और विभागीय रिकॉर्ड में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि संबंधित डॉक्टर ने सेवा ग्रहण करने से मना किया हो।
यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब देश भर में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की गरिमा, धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है। हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों को लेकर पहले भी विभिन्न राज्यों और संस्थानों में विवाद देखने को मिल चुके हैं, जिससे यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता, संवैधानिक पदों की मर्यादा और सार्वजनिक मंचों पर व्यवहार की सीमाओं को लेकर व्यापक विमर्श को जन्म देता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और राजनीतिक दल इस विवाद से क्या सबक लेते हैं और आगे किस तरह की जवाबदेही तय की जाती है।
फिलहाल, नीतीश कुमार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कोई औपचारिक विस्तृत बयान नहीं आया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि यह विवाद बिहार की राजनीति में महिला सम्मान और सार्वजनिक आचरण को लेकर एक अहम बहस का कारण बन चुका है।
