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हिमंता बिस्वा सरमा का तीसरा कार्यकाल तय, NDA की ऐतिहासिक जीत

In Politics
May 08, 2026
हिमंता बिस्वा सरमा का तीसरा कार्यकाल तय, NDA की ऐतिहासिक जीत - RajneetiGuru.com

उत्तर-पूर्वी भारत की राजनीति में एक नया युग अपनी जड़ें मज़बूत कर चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 2026 के असम विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक “हैट्रिक” दर्ज की है। विपक्ष का सूपड़ा साफ करते हुए, एनडीए ने 126 में से 102 सीटों पर शानदार जीत हासिल की है, जो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के राजनीतिक दबदबे पर अंतिम मुहर लगाती है। बुधवार, 6 मई को डॉ. सरमा ने गुवाहाटी के लोक भवन में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को अपना इस्तीफा सौंप दिया। फिलहाल वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 11 मई के बाद आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की प्रबल संभावना है।

चुनावी नतीजे: एनडीए की प्रचंड लहर

2026 के नतीजे असम में भाजपा के अब तक के सबसे मजबूत प्रदर्शन को दर्शाते हैं। 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीती हैं—जो बहुमत के आंकड़े 64 से काफी ऊपर है। इसके सहयोगी दलों, असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने भी महत्वपूर्ण योगदान देते हुए 10-10 सीटें जीतीं।

दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला ‘असम सनमिलितो मंच’ बुरी तरह विफल रहा और उसे केवल 19 सीटें मिलीं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई जैसे बड़े नेताओं की हार ने यह साफ कर दिया कि जनता का झुकाव एनडीए की विकासवादी और सांस्कृतिक विचारधारा की ओर अधिक है।

जालुकबारी: सरमा का अभेद्य किला

हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी पारंपरिक जालुकबारी सीट से लगातार छठी बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस की बिदिशा नियोग को 89,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से हराया। यह जीत न केवल सरमा की व्यक्तिगत लोकप्रियता बल्कि निचले असम में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति का प्रतीक है।

“मैं इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए असम की जनता का धन्यवाद करता हूं। हमने उन लगभग सभी क्षेत्रों में जीत हासिल की है जहाँ स्थानीय आबादी का दबदबा है। यह जीत असम की ‘माटी, भेटी और संस्कृति’ की रक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता की जीत है,” मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस्तीफे के बाद मीडिया से कहा।

रणनीतिक दांव: बंगाली हिंदू मतदाता

2026 के चुनाव प्रचार का एक निर्णायक मोड़ डिटेंशन सेंटरों पर सरमा का आक्रामक रुख था। विपक्ष के उन आरोपों का जवाब देते हुए कि बंगाली हिंदुओं को डिटेंशन सेंटरों में रखा जा रहा है, सरमा ने एक खुली चुनौती दी, “अगर असम के किसी भी डिटेंशन सेंटर में एक भी बंगाली हिंदू है, तो मैं तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।” इस एक बयान ने बराक घाटी और निचले असम में बंगाली हिंदू वोटों को एकजुट कर दिया और विपक्ष के उन प्रयासों को विफल कर दिया जो एनडीए के मतदाता आधार में दरार डालना चाहते थे।

विज़न 2026: आर्थिक महाशक्ति और सामाजिक सुधार

अपने तीसरे कार्यकाल में सरमा ने असम को एक राष्ट्रीय आर्थिक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि 2020-2025 के बीच असम की जीडीपी (GSDP) में 45% की वृद्धि हुई है। आगामी कार्यकाल के लिए उनकी प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं:

  • ‘निजुत बाबू आसोनि’ योजना: 1 फरवरी 2026 को शुरू की गई इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लड़कों को उच्च शिक्षा के लिए ₹2,000 प्रति माह तक की सहायता दी जा रही है।

  • रोज़गार अभियान: पिछले कार्यकाल में 1 लाख नौकरियां देने के बाद, अब 50,000 नए सरकारी पदों पर भर्ती का वादा किया गया है।

  • बहुविवाह पर प्रतिबंध: समाज सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘असम बहुविवाह निषेध अधिनियम’ लाया जाएगा, जिसमें दोषी को 7 साल की जेल का प्रावधान है। यह कानून सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होगा।

     

प्रशासनिक विकेंद्रीकरण: डिब्रूगढ़ बनी दूसरी राजधानी

क्षेत्रीय विकास को संतुलित करने के लिए सरमा ने घोषणा की है कि डिब्रूगढ़ अब असम की दूसरी राजधानी के रूप में कार्य करेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2026 की शुरुआत में डिब्रूगढ़ में दूसरे विधानसभा भवन की आधारशिला रखी थी। 2027 से, प्रतिवर्ष कम से कम एक विधानसभा सत्र डिब्रूगढ़ में आयोजित किया जाएगा, जिससे ऊपरी असम के लोगों को सरकार के करीब होने का अनुभव होगा।

 

असम में भाजपा का उदय

असम 15 सालों तक तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस का गढ़ रहा था। 2016 में भाजपा ने पहली बार यहाँ सरकार बनाई, 2021 में उसे बरकरार रखा और अब 2026 की हैट्रिक ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा ने “हिंदुत्व” और “उप-राष्ट्रवाद” (Sub-nationalism) का एक सफल मिश्रण तैयार किया है। घुसपैठ के मुद्दे पर सख्ती, उग्रवादी समूहों (जैसे उल्फा) के साथ शांति समझौते और ब्रह्मपुत्र पर पुलों जैसे विशाल बुनियादी ढांचे के निर्माण ने असम की तस्वीर बदल दी है।

जैसे ही शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो रही हैं, गुवाहाटी से संदेश साफ है: असम अब भारतीय राजनीति के हाशिये पर नहीं, बल्कि देश की विकास गाथा का मुख्य केंद्र है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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