उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ‘तरंग म्यूजिक सेंटर’ के संचालक अनुकूल कुच्छल ने व्यापार मंडल के दिग्गज नेता संजय मित्तल और उनके सहयोगियों पर ‘धोखाधड़ी से शादी’ कराने का गंभीर आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर नई मंडी कोतवाली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला न केवल एक पारिवारिक विवाद है, बल्कि इसमें साजिश, चोरी और बंधक बनाने जैसे गंभीर आपराधिक आरोप भी शामिल हैं। स्थानीय समाज और व्यापार जगत में इस घटना को लेकर काफी चर्चा है।
क्या है पूरा विवाद?
अनुकूल कुच्छल का आरोप है कि अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष संजय मित्तल ने साजिश रचकर उनकी शादी अपने ड्राइवर की बेटी से करा दी। कुच्छल का दावा है कि इस शादी के लिए उन पर भारी दबाव बनाया गया था और इसे ‘बिना दहेज वाली आदर्श शादी’ के रूप में पेश किया गया था।
शिकायत के मुख्य बिंदु:
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धोखाधड़ी: अनुकूल का कहना है कि शादी के बाद उनकी पत्नी ने शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया और खुद को ‘अपूर्ण’ बताया।
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मेडिकल जांच से इनकार: आरोप है कि जब महिला को डॉक्टर के पास ले जाया गया, तो उसने किसी भी तरह की जांच कराने से मना कर दिया।
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आभूषणों की चोरी: शिकायत के अनुसार, महिला अपने मायके वालों के साथ मिलकर घर से लाखों रुपये के जेवर और कीमती सामान ले गई।
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बंधक बनाना: कुच्छल ने यह भी आरोप लगाया कि संजय मित्तल और अन्य लोगों ने उन्हें बंधक बनाकर डराया-धमकाया।
पुलिस और कोर्ट की कार्रवाई
शुरुआत में पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर अनुकूल कुच्छल ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के निर्देश पर अब पुलिस ने संजय मित्तल, हरि शंकर शर्मा, गणेश और ओमकार कश्यप समेत नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीओ मंडी रूपाली रॉय ने पुष्टि की है:
“कोर्ट के आदेशानुसार मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
कानूनी स्थिति
भारत में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12 के तहत, यदि सहमति धोखाधड़ी या बलपूर्वक ली गई हो, तो विवाह को अमान्य घोषित किया जा सकता है। इस मामले में अनुकूल कुच्छल ने विवाह पंजीकरण रद्द करने की याचिका भी दायर की है। वहीं, दूसरी ओर उनकी पत्नी ने भी परिवार न्यायालय में ससुराल पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
संजय मित्तल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे केवल एक मध्यस्थ थे और कोर्ट में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
यह मामला एक बार फिर वैवाहिक संस्थाओं में पारदर्शिता और विश्वास की कमी को उजागर करता है। जहां एक तरफ कुच्छल इसे एक बड़ी साजिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपी पक्ष इसे व्यक्तिगत रंजिश का नाम दे रहा है। पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
