भारत ने आज 2025 के उस काले दिन को याद किया जब पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की ओर से शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सरकार ने ‘आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की अपनी नीति को दोहराते हुए कहा कि मासूमों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने संदेश में कहा, “आज से ठीक एक साल पहले पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को मैं नमन करता हूं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। मेरी संवेदनाएं उन शोकाकुल परिवारों के साथ हैं जो इस अपूरणीय क्षति को झेल रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “एक राष्ट्र के रूप में हम दुख और संकल्प के साथ एकजुट हैं। भारत कभी भी किसी भी प्रकार के आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा। आतंकवादियों के नापाक इरादे कभी सफल नहीं होंगे।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पीड़ितों को याद करते हुए कहा कि “अपनों को खोने का दुख और दर्द आज भी हर भारतीय के दिल में है।” उन्होंने आतंकवाद को मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए संकल्प लिया कि भारत आतंकवाद और इसे पनाह देने वालों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में, जहाँ यह हमला हुआ था, स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों ने एक मौन प्रार्थना सभा का आयोजन किया। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में भी विशेष प्रार्थना सभाएं हुईं, जहाँ से अधिकांश पर्यटक आए थे।
बैसरन घाटी का वो भयावह दिन
22 अप्रैल, 2025 को, तीन हथियारों से लैस आतंकवादियों—जिनकी पहचान बाद में बिलाल अफ़ज़ल, हमजा ताहिर खान और हनान ज़फ़र के रूप में हुई—ने ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर बैसरन घाटी में घुसपैठ की थी। सैन्य वर्दी और कश्मीरी फेरन पहने इन हमलावरों ने घुड़सवारी और ज़िपलाइनिंग का आनंद ले रहे निहत्थे पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं।
यह हमला अपनी क्रूरता के लिए जाना गया क्योंकि चश्मदीदों के अनुसार, आतंकवादियों ने धर्म के आधार पर पहचान करने के बाद पुरुषों को उनकी पत्नियों और बच्चों के सामने गोली मार दी थी। इस हमले में 25 पर्यटकों के अलावा एक स्थानीय टट्टू-चालक सैयद आदिल हुसैन शाह की भी मौत हुई, जिन्होंने एक आतंकवादी की बंदूक छीनने की कोशिश कर पर्यटकों की जान बचाने का साहसी प्रयास किया था।
सुरक्षा कार्रवाई: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया। हमले के कुछ ही हफ्तों के भीतर भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। यह एक बड़े स्तर का सैन्य अभियान था जिसके तहत सीमा पार स्थित आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े नौ प्रमुख आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया गया और 100 से अधिक आतंकवादियों का सफाया किया गया।
इसके बाद, सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ चलाया, जो विशेष रूप से उन हत्यारों को पकड़ने के लिए था जिन्होंने पहलगाम में गोलियां चलाई थीं। दाचीगाम के दुर्गम इलाकों में दो महीने की कड़ी निगरानी के बाद, 28 जुलाई, 2025 को एक निर्णायक मुठभेड़ में तीनों मुख्य हमलावरों को मार गिराया गया। अमित शाह ने संसद में इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे “रणनीतिक योजना और अंतर-एजेंसी समन्वय की एक उत्कृष्ट मिसाल” बताया।
कूटनीतिक जीत और जांच के निष्कर्ष
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस हमले के सीमा पार संपर्कों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। NIA ने पुष्टि की कि यह हमला पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) द्वारा अंजाम दिया गया था।
भारत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत तब मिली जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से TRF को पहलगाम नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। यह पहली बार था जब किसी संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज में इस समूह का नाम लिया गया, जिससे आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान की छद्म नीति दुनिया के सामने बेनकाब हो गई।
कश्मीर पर्यटन का पुनरुत्थान
एक साल बाद, पहलगाम में पर्यटन की रौनक फिर से लौट रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त गश्त के साथ एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया है। स्थानीय समुदाय के नेताओं ने इस पुनरुत्थान में बड़ी भूमिका निभाई है, यह संदेश देते हुए कि ‘कश्मीरियत’ की भावना किसी भी आतंकी मंसूबे से बड़ी है।
पहलगाम के एक स्थानीय होटल व्यवसायी ने कहा, “पर्यटन हमारी जीवनरेखा है, और हम कुछ कायरों को अपना भविष्य तय करने नहीं देंगे।” प्रशासन ने स्थानीय टट्टू-चालकों और गाइडों को आपातकालीन स्थिति में मदद करने और सुरक्षा बलों के लिए ‘आंख और कान’ के रूप में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया है।
पहलगाम हमले की पहली बरसी पर आज पूरा देश गमगीन है, लेकिन उसका संकल्प अटूट है। इस त्रासदी ने भारत के आंतरिक सुरक्षा ढांचे और सीमा पार आतंकवाद के प्रति उसके रुख को हमेशा के लिए बदल दिया है। 26 निर्दोषों की याद में आज भारत एक ऐसे भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है जहाँ शांति और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
