
भारत को मिली पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल संचालित ट्रेन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल (Hydrogen Fuel Cell) संचालित ट्रेन के शुभारंभ को आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। ट्रेन के उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने इस परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और भारतीय रेलवे के अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कहा कि भारत का पहला हाइड्रोजन संचालित रेल इंजन देश के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य और आत्मनिर्भरता के संकल्प को नई मजबूती देगा। उन्होंने इसे भारत के रेल इतिहास में एक नया अध्याय बताया।
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सिंह से यह गुण सीखना चाहिए कि वह छोटा हो या बड़ा, हर कार्य को पूरी निष्ठा, समर्पण और उत्साह के साथ पूरा करे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यही भावना भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।
जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन
भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित ट्रेन का संचालन उत्तरी रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जाएगा। इस परियोजना के साथ भारत स्वच्छ और आधुनिक रेल परिवहन के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से संचालित होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इसके लिए विशेष हाइड्रोजन भंडारण, रिफ्यूलिंग सिस्टम और अन्य आधुनिक परिचालन ढांचा भी विकसित किया गया है।
स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
भारतीय रेलवे के अनुसार यह परियोजना एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित की गई है। इसका उद्देश्य भारत में हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन की व्यवहारिकता का परीक्षण करना और भविष्य में इस तकनीक के व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेनें न केवल ऊर्जा दक्षता बढ़ाएंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन को भी गति देंगी।
पूरी तरह भारत में विकसित हुई तकनीक
रेलवे ने बताया कि इस ट्रेन का डिजाइन और तकनीकी मानक रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) द्वारा तैयार किए गए हैं। पूरी परियोजना का विकास स्वदेशी तकनीक के आधार पर भारत में किया गया है।
यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारतीय रेलवे की नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
भविष्य की रेल व्यवस्था की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी, ईंधन आयात का बोझ घटेगा और भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
भारतीय रेलवे पहले ही विद्युतीकरण, वंदे भारत ट्रेनों और आधुनिक सिग्नलिंग जैसी कई परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।




