
पंजाब की भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को राज्य विधानसभा में विश्वास मत जीत लिया। 117 सदस्यीय सदन में यह मत ध्वनि मत से सर्वसम्मति से पारित हुआ। यह विशेष एक-दिवसीय सत्र उस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बुलाया गया था जब 24 अप्रैल को AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे। इस जीत के साथ भगवंत मान सरकार ने न केवल अपनी ताकत का प्रदर्शन किया बल्कि विपक्ष की हर उस कोशिश को नाकाम कर दिया जो पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रही थी।
88 विधायकों की उपस्थिति — ताकत का प्रदर्शन
विश्वास मत के दौरान AAP के 94 में से 88 विधायक सदन में उपस्थित रहे और उन्होंने भगवंत मान सरकार के समर्थन में मतदान किया। यह उपस्थिति अपने आप में एक ज़ोरदार राजनीतिक संदेश है। जब राज्यसभा में पार्टी के 7 सांसदों के भाजपा में जाने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि विधायक भी टूट सकते हैं, तब 88 विधायकों का एकजुट होकर सदन में आना और सरकार के पक्ष में खड़ा होना — यह बताता है कि पंजाब में AAP की ज़मीनी पकड़ अभी भी मज़बूत है।
विश्वास मत क्यों बुलाया गया?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस विशेष सत्र को बुलाने का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कदम उन “झूठी अफवाहों और खबरों” को खारिज करने के लिए ज़रूरी था जो AAP विधायकों के संभावित दलबदल को लेकर फैलाई जा रही थीं। 24 अप्रैल 2026 को AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इस घटना के बाद विपक्ष ने यह माहौल बनाना शुरू कर दिया था कि भगवंत मान सरकार अस्थिर हो गई है और विधायक भी जल्द पाला बदल सकते हैं। भगवंत मान ने इन अटकलों का जवाब सदन के भीतर देने का फैसला किया — और विश्वास मत से बेहतर जवाब क्या हो सकता था?
कांग्रेस का वॉकआउट, BJP का बहिष्कार
विश्वास मत के दौरान विपक्षी दलों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी। कांग्रेस पार्टी ने मतदान से पहले ही सदन से वॉकआउट कर लिया। पार्टी का कहना था कि यह विश्वास मत एक “नाटक” है और इसमें भाग लेना उनके लिए उचित नहीं है। भाजपा ने एक कदम आगे जाते हुए पूरे सत्र का ही बहिष्कार कर दिया। भाजपा नेताओं का तर्क था कि जब पार्टी के ही 7 राज्यसभा सांसद छोड़ गए हैं, तो यह विश्वास मत केवल दिखावा है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का वॉकआउट और BJP का बहिष्कार — दोनों ही दलों की कमज़ोरी को दर्शाते हैं। अगर उनके पास वास्तव में सरकार को अस्थिर करने की ताकत होती, तो वे सदन में रहकर अपनी बात रखते।
राज्यसभा दलबदल — क्या था मामला?
24 अप्रैल 2026 की वह घटना जिसने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया — AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने एक साथ भाजपा का साथ चुना। यह AAP के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा झटका था। इस दलबदल के बाद से ही पंजाब में भगवंत मान सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए जाने लगे थे। विपक्ष ने इस घटना को AAP की “आंतरिक टूट” का संकेत बताया। लेकिन विश्वास मत के नतीजे ने साफ कर दिया कि राज्यसभा और विधानसभा की राजनीति अलग-अलग है। राज्यसभा में जो हुआ वह AAP के लिए नुकसानदेह था, लेकिन पंजाब की विधानसभा में पार्टी की पकड़ अभी भी बेहद मज़बूत है।
AAP के लिए क्या है आगे की राह?
इस विश्वास मत की जीत के बाद भगवंत मान सरकार के सामने अब कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं —
1. राज्यसभा की खाली सीटें भरना: 7 सांसदों के जाने के बाद इन सीटों को भरने की प्रक्रिया AAP के लिए अगली बड़ी चुनौती है।
2. पार्टी की एकजुटता बनाए रखना: विधायकों का विश्वास बनाए रखना और उन्हें भाजपा के संभावित प्रलोभनों से दूर रखना ज़रूरी होगा।
3. विकास का एजेंडा: राजनीतिक उठापटक के बीच पंजाब में शिक्षा, स्वास्थ्य और किसान कल्याण के कार्यों को गति देना ही AAP की असली ताकत होगी।
एक नज़र में — विश्वास मत के मुख्य तथ्य
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| सदन की कुल सीटें | 117 |
| AAP के कुल विधायक | 94 |
| विश्वास मत में उपस्थित | 88 |
| मतदान का तरीका | ध्वनि मत — सर्वसम्मति |
| कांग्रेस | वॉकआउट |
| BJP | पूर्ण बहिष्कार |
| विश्वास मत का परिणाम | AAP की जीत ✅ |




