
नीति आयोग ने गुरुवार को “Strategic Roadmap for Making Ayurveda Global” शीर्षक से एक व्यापक रिपोर्ट जारी की, जिसमें वर्ष 2047 तक आयुर्वेद को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त, वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने की रणनीति प्रस्तुत की गई है। नीति आयोग के स्वास्थ्य प्रभाग द्वारा प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (PwC) के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट में आयुर्वेद की वैश्विक स्थिति का आकलन करते हुए इसके विस्तार की संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट का विमोचन नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में किया। कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, विभिन्न सरकारी एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
डॉ. लाहिड़ी ने कहा कि आयुर्वेद का वैश्वीकरण भारत के लिए पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात में वृद्धि और भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समयबद्ध और समन्वित सरकारी प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल निर्यात या बाजार का विस्तार नहीं है, बल्कि दुनिया भर के लोगों को वैज्ञानिक आधार वाले वैकल्पिक स्वास्थ्य विकल्प उपलब्ध कराकर बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने इसे “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना के अनुरूप बताया।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पिछले एक दशक में मंत्रालय ने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं और यह रिपोर्ट उन प्रयासों को नई दिशा और गति प्रदान करेगी। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (यूएनईएस) अक्विनो विमल ने भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक साझेदारियों के माध्यम से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में भारत की प्रगति का उल्लेख किया।
व्यापक परामर्श, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अध्ययन और साक्ष्य-आधारित विश्लेषण पर आधारित इस रिपोर्ट में उपलब्धता, स्वीकार्यता और प्रसार पर केंद्रित तीन-स्तरीय रणनीति प्रस्तावित की गई है। इसके तहत वैश्विक आयुर्वेद कार्यबल का विस्तार, विनिर्माण एवं निर्यात को बढ़ावा, अनुसंधान और शिक्षा को सशक्त करना, नियामकीय मानकों का अनुपालन, बीमा कवरेज बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना, ब्रांड पहचान विकसित करना और मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को प्रोत्साहित करने जैसे प्रमुख सुझाव दिए गए हैं।
‘विकसित भारत@2047’ की परिकल्पना के अनुरूप तैयार यह रोडमैप नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत, आयुर्वेद विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज का कार्य करेगा। नीति आयोग का कहना है कि यह रिपोर्ट ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए भारत को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
