
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटिंग और डिजिटल बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने डेटा सेंटर के सतत विकास के लिए नया मूल्यांकन फ्रेमवर्क जारी किया है। इसका उद्देश्य राज्यों को डेटा सेंटर परियोजनाओं से जुड़े निवेश प्रस्तावों का व्यवस्थित आकलन करने, जरूरी बुनियादी ढांचे की पहचान करने और परियोजनाओं का टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में मदद देना है।
यह फ्रेमवर्क नई दिल्ली में जारी किया गया। इसके जरिए राज्य सरकारें डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए आने वाले निवेश प्रस्तावों की समीक्षा एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत कर सकेंगी। साथ ही, परियोजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक तेज और पूर्वानुमान योग्य बनाने तथा लंबे समय में आर्थिक लाभ बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
डेटा सेंटर भारत के भविष्य के विकास के लिए अहम
कार्यक्रम में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अनुराग जैन ने डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य के विकास के लिए ये क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं और देश के पास इनके विस्तार के जरिए आगे बढ़ने का बड़ा अवसर है।
देश में AI तकनीक, डिजिटल सेवाओं और कंप्यूटिंग क्षमता की मांग बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में नई परियोजनाओं की योजना बनाते समय निवेश, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और सतत विकास जैसे पहलुओं का मूल्यांकन जरूरी है।
नीति आयोग का नया फ्रेमवर्क इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि राज्य सरकारें अपने स्तर पर डेटा सेंटर परियोजनाओं का बेहतर आकलन कर सकें।
राज्यों को निवेश प्रस्तावों के मूल्यांकन में मिलेगी मदद
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने कहा कि डेटा सेंटर मूल्यांकन फ्रेमवर्क उन प्रमुख मुद्दों को स्पष्ट करता है, जिनके आधार पर राज्य सरकारों को डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रस्तावों का मूल्यांकन करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट का इस्तेमाल करके राज्य सरकारें निवेश प्रस्तावों की व्यवस्थित और उचित तरीके से समीक्षा कर सकेंगी। इससे परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
फ्रेमवर्क का प्रमुख उद्देश्य राज्यों को एक व्यावहारिक निर्णय-सहायता उपकरण उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से सरकारें परियोजनाओं की जरूरतों और अपने राज्य की प्राथमिकताओं के अनुसार निवेश प्रस्तावों पर विचार कर सकती हैं।
बिजली और आईटी मंत्रालय के परामर्श से तैयार हुआ फ्रेमवर्क
यह फ्रेमवर्क बिजली मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के परामर्श से विकसित किया गया है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि राज्य सरकारें अपनी स्थानीय जरूरतों और विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप इसका इस्तेमाल कर सकें।
नीति आयोग के अनुसार, यह ढांचा नियमन की एक अतिरिक्त परत बनाने के बजाय राज्यों को निर्णय लेने में सहायता देने पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य डेटा सेंटर परियोजनाओं के क्रियान्वयन को तेज करना, प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता लाना और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ को अधिकतम करना है।
इस दृष्टिकोण से राज्य सरकारों को निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन करते समय एक व्यवस्थित आधार मिल सकता है। हालांकि, फ्रेमवर्क के वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि राज्य इसे किस तरह अपनाते हैं और परियोजनाओं की योजना व क्रियान्वयन में इसका उपयोग कैसे किया जाता है।
भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने की पहल
डेटा सेंटर डिजिटल सेवाओं, AI और आधुनिक कंप्यूटिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। ऐसे में इनके सतत विकास के लिए राज्यों की योजना और निवेश प्रस्तावों का व्यवस्थित मूल्यांकन अहम भूमिका निभा सकता है।
नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब का नया फ्रेमवर्क राज्यों को डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए बेहतर निर्णय लेने में सहायता देने की दिशा में एक पहल है। इसका व्यापक उद्देश्य भारत के डेटा सेंटर इकोसिस्टम को मजबूत करना और देश की बढ़ती डिजिटल तथा कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।




