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NFHS-6 रिपोर्ट: मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधरा, बढ़ीं जीवनशैली बीमारियां

In Health
July 24, 2026
NFHS-6 रिपोर्ट मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधरा, बढ़ीं जीवनशैली बीमारियां - RajneetiGuru.com

देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन दूसरी ओर मोटापा, मधुमेह और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट में यह तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से सर्वेक्षण से जुड़े प्रमुख आंकड़े साझा किए।

रिपोर्ट के अनुसार, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत NFHS-5 (2019-21) के 88.6 प्रतिशत से बढ़कर NFHS-6 (2023-24) में 90.6 प्रतिशत हो गया। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच (एंटीनैटल केयर) मिलने का दायरा बढ़कर 95.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या 58.5 प्रतिशत से बढ़कर 65.2 प्रतिशत हो गई। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में होने वाले प्रसव भी 89.4 प्रतिशत से बढ़कर 91.3 प्रतिशत दर्ज किए गए।

परिवार नियोजन और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े संकेतकों में भी सुधार देखने को मिला है। गर्भनिरोधक उपयोग दर 66.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई, जबकि परिवार नियोजन की अपूर्ण आवश्यकता 9.4 प्रतिशत से घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई। देश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.0 पर स्थिर बनी हुई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे है।

बच्चों के टीकाकरण अभियान में भी बेहतर परिणाम सामने आए हैं। 12 से 23 माह के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया। खसरा वैक्सीन की दूसरी खुराक का कवरेज 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 71.8 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि रोटावायरस वैक्सीन का कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत और गंभीर कुपोषण (सीवियर वेस्टिंग) 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत दर्ज किया गया।

हालांकि रिपोर्ट ने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को लेकर चिंता भी जताई है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में अधिक वजन या मोटापे की दर 30.7 प्रतिशत और पुरुषों में 27.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महिलाओं में उच्च रक्त शर्करा या मधुमेह की दर 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत तथा पुरुषों में 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत हो गई। हालांकि उच्च रक्तचाप के मामलों में दोनों वर्गों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

सरकार ने लोकसभा को यह भी बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत 20 जुलाई 2026 तक देशभर में 94.87 करोड़ ABHA आईडी बनाई जा चुकी हैं। मिशन के तहत 5.36 लाख सत्यापित स्वास्थ्य संस्थान और 10.09 लाख स्वास्थ्य पेशेवर भी पंजीकृत किए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, इस मिशन से इलाज की प्रक्रिया तेज हुई है, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में कमी आई है और विशेष रूप से महिलाओं तथा दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मिशन में मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का कोई केंद्रीकृत भंडार नहीं बनाया जाता और सभी स्वास्थ्य सूचनाओं का आदान-प्रदान केवल मरीज की सहमति से ही किया जाता है।

इसके अलावा सरकार ने बताया कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) का बजट पिछले एक दशक में पांच गुना से अधिक बढ़ाया गया है। वर्ष 2014-15 में 932 करोड़ रुपये का बजट बढ़कर 2026-27 के बजट अनुमान में 4,821.21 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त निवेश से भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के माध्यम से नवाचार, बहु-विषयक अनुसंधान और वैज्ञानिक शोध को नई गति मिलेगी। इसके लिए विभिन्न श्रेणियों की अनुसंधान अनुदान योजनाएं भी शुरू की गई हैं, जिनका उद्देश्य भारत के स्वास्थ्य अनुसंधान तंत्र को और मजबूत बनाना है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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