
पश्चिम बंगाल की राजनीति और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने आधिकारिक तौर पर “लक्ष्मी भंडार” योजना को जारी रखने की पुष्टि की है। मई 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पहली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस घोषणा ने राज्य की उन 2 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों की चिंता को दूर कर दिया है, जिन्हें सत्ता परिवर्तन के बाद मासिक सहायता बंद होने का डर था।
सरकार केवल पुरानी योजना को जारी ही नहीं रख रही है, बल्कि इसे और अधिक भव्य बनाने की तैयारी में है। भाजपा ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए लक्ष्मी भंडार को “अन्नपूर्णा भंडार” योजना में बदलने की घोषणा की है। इस नई योजना के तहत, मासिक सहायता को बढ़ाकर ₹3,000 करने का वादा किया गया है, जो सभी श्रेणियों की महिलाओं के लिए समान होगा।
बड़ा बदलाव: लक्ष्मी से अन्नपूर्णा तक का सफर
पिछले कई वर्षों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने लक्ष्मी भंडार योजना को अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाया था। चुनाव प्रचार के दौरान यह तर्क दिया गया था कि यदि भाजपा सत्ता में आई, तो यह योजना बंद कर दी जाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ताजा घोषणा ने इस चुनावी विमर्श को पूरी तरह बदल दिया है।
वर्तमान भुगतान संरचना (फरवरी 2026 की वृद्धि के बाद): चुनावों से पहले पिछली सरकार ने अंतरिम बजट में सहायता राशि में वृद्धि की थी। वर्तमान में भुगतान इस प्रकार है:
सामान्य वर्ग: ₹1,500 प्रति माह।
SC/ST वर्ग: ₹1,700 प्रति माह।
भविष्य की योजना: अन्नपूर्णा भंडार भाजपा सरकार ने 1 जून 2026 से अन्नपूर्णा भंडार योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का लक्ष्य रखा है।
मासिक लाभ: ₹3,000 (सीधे बैंक खाते में)।
आयु सीमा में विस्तार: पात्रता की आयु, जो पहले 25-60 वर्ष थी, अब बढ़ाकर 21-60 वर्ष किए जाने की उम्मीद है। इससे लाखों युवा महिलाएं भी इस दायरे में आ जाएंगी।
“हम यहाँ सेवा करने आए हैं, योजनाओं को बंद करने नहीं। लक्ष्मी भंडार प्राप्त करने वाली हर बहन को उसका लाभ मिलता रहेगा, लेकिन अब वह लाभ पहले से दोगुना होगा,” मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा। “अन्नपूर्णा भंडार बंगाल की ‘मातृ शक्ति’ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है।”
लक्ष्मी भंडार की विरासत
फरवरी 2021 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार द्वारा शुरू की गई लक्ष्मी भंडार योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को सहायता प्रदान करना था। मासिक आय की गारंटी देकर यह योजना ग्रामीण और अर्ध-शहरी बंगाल में अत्यंत लोकप्रिय हो गई थी। शुरुआत में इसमें सामान्य वर्ग को ₹500 और SC/ST महिलाओं को ₹1,000 मिलते थे, जिसे बाद में बढ़ाकर क्रमशः ₹1,000 और ₹1,200 किया गया था।
राजनीतिक दांव और आर्थिक चुनौतियां
2026 के चुनावों में भाजपा की “काउंटर-गारंटी” रणनीति सफल रही। ₹3,000 के मासिक लाभ का प्रस्ताव देकर पार्टी ने चर्चा को “योजना बचाने” से हटाकर “लाभ बढ़ाने” पर केंद्रित कर दिया। हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इस वृद्धि से राज्य के खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा। 2.1 करोड़ लाभार्थियों के लिए भुगतान दोगुना करने के लिए सालाना ₹75,000 करोड़ से अधिक के आवंटन की आवश्यकता होगी। सरकार को इस विशाल खर्च को पूरा करने के लिए केंद्रीय अनुदान और अन्य राज्य व्ययों के पुनर्गठन पर निर्भर रहना होगा।




