
राष्ट्रीय राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुधारने और ई-रिक्शा चालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से दिल्ली परिवहन विभाग ने आज से ‘एक व्यक्ति, एक ई-रिक्शा’ की नीति को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। यह नया नियम शहर में बड़े पैमाने पर ई-रिक्शा के अवैध व्यापार और ‘रेंटल मॉडल’ (किरायेदारी प्रथा) को खत्म करने के लिए बनाया गया है।
आज से ई-रिक्शा के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल फिर से खुल गया है, जिसके साथ ही दिल्ली में ई-रिक्शा के संचालन के लिए कड़े नियम और सुरक्षा मानक प्रभावी हो गए हैं।
नए नियमों का मुख्य विवरण
2026 के ये नए दिशा-निर्देश दिल्ली के परिवहन क्षेत्र में पिछले एक दशक का सबसे बड़ा सुधार माने जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ई-रिक्शा क्षेत्र को एक व्यावसायिक उद्योग से हटाकर ‘स्वरोजगार मॉडल’ में बदलना है।
1. स्वामित्व की सीमा: ‘एक आदमी-एक ई-रिक्शा’ नए नियमों के तहत अब कोई भी व्यक्ति अपने नाम पर एक से अधिक ई-रिक्शा पंजीकृत नहीं करा सकेगा। पहले, कई बड़े निवेशक दर्जनों ई-रिक्शा खरीद लेते थे और उन्हें दिहाड़ी मजदूरों को ₹300 से ₹500 के दैनिक किराये पर देते थे। इससे वास्तविक चालक को बहुत कम बचत होती थी। अब, ई-रिक्शा का पंजीकरण उसी के नाम पर होगा जो उसे चलाएगा।
2. 10 दिनों की अनिवार्य ट्रेनिंग सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, 15 मई से ई-रिक्शा पंजीकरण के लिए 10 दिनों का ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया गया है। आवेदकों को ट्रैफिक नियमों, यात्री सुरक्षा और बैटरी के रखरखाव की जानकारी दी जाएगी। ट्रेनिंग के बिना पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं होगी।
3. वार्षिक फिटनेस सर्टिफिकेट अब हर साल ई-रिक्शा का फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य होगा। इसमें वाहन की बॉडी, ब्रेक, हेडलाइट और बैटरी की जांच की जाएगी। फिटनेस सर्टिफिकेट न होने पर वाहन को सड़क पर चलाना अवैध माना जाएगा।
विशेषज्ञों की राय
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारा उद्देश्य ई-रिक्शा क्षेत्र को व्यवस्थित करना है। अब तक बड़े मालिकों ने सड़कों पर अनधिकृत वाहनों की बाढ़ ला दी थी, जिससे जाम और दुर्घटनाएं बढ़ती थीं। अब सिर्फ चालक ही मालिक होगा, जिससे सरकारी सब्सिडी और लाभ सीधे गरीब चालक तक पहुंचेंगे।”
दिल्ली में ई-रिक्शा का सफर
दिल्ली में ई-रिक्शा की शुरुआत लगभग 2010 के आसपास हुई थी। यह मेट्रो स्टेशनों से घरों तक पहुँचने का एक सस्ता और पर्यावरण अनुकूल साधन बनकर उभरा। लेकिन नियमों की कमी के कारण इनकी संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ गई। 2024 तक दिल्ली में लगभग 1.5 लाख से अधिक ई-रिक्शा चल रहे थे, जिनमें से कई अनरजिस्टर्ड थे। 15 मई 2026 से लागू ये नियम इसी अराजकता को समाप्त करने की एक कोशिश है।
आगामी चुनौतियाँ
इस नीति को लागू करना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसका पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। सरकार को यह देखना होगा कि कोई व्यक्ति अपने परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर ‘बेनामी’ रजिस्ट्रेशन न कराए। साथ ही, ई-रिक्शा के लिए आधिकारिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि बिजली चोरी और आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।




