असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए गुरुवार को हुए मतदान के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गुवाहाटी शहर की पुलिस ने हरियाणा के प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता और संचार रणनीतिकार संदीप यादव को हिरासत में लिया है। यादव गुवाहाटी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र से असम जातीय परिषद (एजेपी) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी के डिजिटल अभियान का प्रबंधन कर रहे थे। उन पर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के “साइलेंस पीरियड” (मौन अवधि) प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप है।
स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव के करीबी सहयोगी माने जाने वाले संदीप यादव की हिरासत ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे “चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना” करार दिया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के पालन के लिए आवश्यक थी।
घटनाक्रम: आरोप और हिरासत
संदीप यादव को 9 अप्रैल, 2026 की सुबह गुवाहाटी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र के एक स्थान से हिरासत में लिया गया। पानबाजार पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, यादव—जो हरियाणा के निवासी हैं—मतदान से 48 घंटे पहले की प्रतिबंधित अवधि के दौरान भी निर्वाचन क्षेत्र में मौजूद पाए गए।
चुनाव नियमों के अनुसार, मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले सभी बाहरी (गैर-स्थानीय) राजनीतिक कार्यकर्ताओं और रणनीतिकारों को निर्वाचन क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य है। पुलिस का आरोप है कि यादव ने न केवल क्षेत्र नहीं छोड़ा, बल्कि वे सोशल मीडिया गतिविधियों और समन्वय कार्यों में भी सक्रिय थे, जो मतदान के दिन मतदाताओं को प्रभावित कर सकते थे।
गुवाहाटी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमें सूचना मिली थी कि बाहरी व्यक्ति प्रतिबंधित अवधि में चुनावी तंत्र चला रहे हैं। उनकी हिरासत पूछताछ के लिए ली गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है या नहीं।”
कौन हैं संदीप यादव?
संदीप यादव उत्तर भारत के जमीनी राजनीतिक आंदोलनों का एक जाना-माना नाम हैं। वे वर्तमान में भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय सचिव और संचार प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उनका करियर जय किसान आंदोलन से भी गहराई से जुड़ा रहा है, जहाँ उन्होंने 2020-2021 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान मीडिया प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विपक्ष के डिजिटल विमर्श के मुख्य रणनीतिकार के रूप में, उन्हें एजेपी द्वारा कुंकी चौधरी के अभियान को गति देने के लिए असम लाया गया था। उनकी जिम्मेदारियों में सोशल मीडिया संदेश तैयार करना और डिजिटल आउटरीच का प्रबंधन करना शामिल था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
गुवाहाटी सेंट्रल से एजेपी उम्मीदवार कुंकी चौधरी ने इस कार्रवाई को सत्ताधारी दल की “हताशा” बताया। उन्होंने कहा, “संदीप यादव कानूनी दायरे में रहकर संचार में हमारी सहायता कर रहे थे। उनकी हिरासत हमारे चुनावी प्रबंधन को बाधित करने और डराने का एक प्रयास है।”
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि “चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता” के लिए यह जरूरी है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि नियम सबके लिए समान हैं, चाहे वह असम का हो या हरियाणा का।
“मतदान के लिए निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करने के लिए मौन अवधि की अखंडता आवश्यक है। विशेष रूप से डिजिटल माध्यमों से होने वाले उल्लंघन को सख्ती से रोका जाना चाहिए,” गुवाहाटी स्थित एक स्वतंत्र चुनाव पर्यवेक्षक ने कहा।
2026 असम चुनाव का महत्व
2026 का असम चुनाव राज्य के इतिहास में सबसे कड़े मुकाबलों में से एक रहा है। गुरुवार को 126 सीटों पर हुए मतदान में 85% से अधिक का भारी मतदान दर्ज किया गया। मुख्य मुकाबला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाले एनईडीए (NEDA) और विपक्षी गठबंधन असम संमिलित मोर्चा (ASM) के बीच है।
गुवाहाटी सेंट्रल जैसी शहरी सीट पर चुनाव आयोग ने होटलों और गेस्ट हाउसों में गहन तलाशी अभियान चलाया था ताकि बाहरी लोगों की पहचान की जा सके। संदीप यादव की हिरासत इसी व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य भर में दर्जनों लोगों को इसी तरह के उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया है।
कानूनी स्थिति
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मौन अवधि के उल्लंघन पर दो साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। फिलहाल अधिकारी यादव के डिजिटल लॉग और यात्रा विवरणों की जांच कर रहे हैं। यह घटना चुनावी प्रक्रिया में “डिजिटल अभियान” को विनियमित करने की ईसीआई की बढ़ती चुनौतियों को भी रेखांकित करती है।
