भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले 250 अरब डॉलर के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग को देश के नए श्रम कानूनों से एक बड़ा वित्तीय झटका लग सकता है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ (Jefferies) ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नए नियमों के लागू होने से आईटी कंपनियों के दिसंबर तिमाही के मुनाफे में 10% से 20% तक की भारी गिरावट आ सकती है।
नवंबर 2025 से प्रभावी होने वाले चार नए श्रम कोड के तहत, कंपनियों को अपने कर्मचारियों के वेतन ढांचे (Compensation Structure) और भत्तों की गणना के तरीकों में बदलाव करना होगा। जेफ़रीज़ के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप ग्रैच्युटी, भविष्य निधि (PF) और छुट्टियों के बदले नकद भुगतान (Leave Encashment) से जुड़ी देनदारियों में 27% से 70% तक की वृद्धि हो सकती है।
मार्जिन पर दबाव और वेतन ढांचे में बदलाव
नए वेतन कोड के तहत, “मजदूरी” (Wages) की परिभाषा बदल दी गई है। अब किसी भी कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा ‘मूल वेतन’ (Basic Salary) और प्रतिधारण भत्तों का होना चाहिए। वर्तमान में, अधिकांश आईटी कंपनियां इस हिस्से को 30%–40% के बीच रखती हैं।
चूंकि पीएफ और ग्रैच्युटी की गणना मूल वेतन के आधार पर होती है, इसलिए इस आधार के बढ़ने से कंपनियों का खर्च अचानक बढ़ जाएगा। जेफ़रीज़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “यह वृद्धि दिसंबर 2025 के परिणामों में एकमुश्त प्रभाव (One-time impact) के रूप में दिखाई देगी।”
कर्मचारी लागत में संरचनात्मक वृद्धि
अस्थायी वित्तीय झटके के अलावा, यह कानून आईटी क्षेत्र की लागत में स्थायी वृद्धि भी लाएगा:
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फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी: अब 5 साल के बजाय केवल 1 साल की सेवा के बाद ही कर्मचारी ग्रैच्युटी के हकदार होंगे।
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छुट्टियों का नकद भुगतान: 30 दिन से अधिक की छुट्टियों के लिए अब प्रतिवर्ष नकद भुगतान करना अनिवार्य होगा।
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हाथ में आने वाले वेतन (Take-home Pay) में कमी: पीएफ में अधिक योगदान के कारण कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन 4% से 6% तक कम हो सकता है।
एऑन (Aon) के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए, जेफ़रीज़ ने बताया कि लगभग दो-तिहाई आईटी कंपनियां मानती हैं कि इन नए नियमों के तहत उनकी कुल कर्मचारी लागत में 5% तक की वृद्धि होगी।
कंपनियों पर अलग-अलग प्रभाव
जेफ़रीज़ का मानना है कि इस बदलाव का असर सभी कंपनियों पर एक जैसा नहीं होगा। टीसीएस (TCS), इन्फोसिस और IKS जैसी कंपनियों पर इसका असर सबसे कम होने की संभावना है क्योंकि उनका मार्जिन प्रोफाइल मजबूत है। इसके विपरीत, कोफ़ोर्ज (Coforge), एलटीआईमाइंडट्री (LTIMindtree) और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों को अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक स्तर पर धीमी राजस्व वृद्धि के बीच, यह नया संकट आईटी क्षेत्र के शेयरों के मूल्यांकन (Valuation) पर भी दबाव डालेगा।
नए लेबर कोड क्या हैं?
भारत सरकार ने 29 पुराने कानूनों को मिलाकर चार नए कोड तैयार किए हैं: मजदूरी कोड, सामाजिक सुरक्षा कोड, औद्योगिक संबंध कोड और व्यावसायिक सुरक्षा कोड। इनका उद्देश्य देश के श्रम कानूनों को आधुनिक बनाना और श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। हालांकि, आईटी जैसे सेवा-आधारित क्षेत्रों के लिए यह बदलाव वित्तीय प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती लेकर आया है।
निवेशकों के लिए राय
चुनौतियों के बावजूद, जेफ़रीज़ ने कुछ चुनिंदा शेयरों पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। लार्ज-कैप में इन्फोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज उसकी पसंद बने हुए हैं, जबकि मिड-कैप में उसने कोफ़ोर्ज और एमफैसिस पर भरोसा जताया है।
मंगलवार को निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में उभरते जोखिमों के प्रति निवेशकों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि भारतीय आईटी उद्योग के लिए आगामी कुछ तिमाहियाँ चुनौतीपूर्ण होने वाली हैं।
