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ममता की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ मंदिर रणनीति

In Politics
December 31, 2025
rajneetiguru.com - ममता बनर्जी की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ मंदिर राजनीति रणनीति। Image Credit – The indian Express

कोलकाता — पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हाल के महीनों में मंदिरों और धार्मिक सांस्कृतिक परियोजनाओं पर बढ़ता जोर राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जिसमें प्रत्यक्ष वैचारिक बदलाव के बजाय सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से व्यापक हिंदू मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य 2026 के विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहा है।

अप्रैल महीने में ममता बनर्जी ने दीघा में जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन किया था, जिसे राज्य सरकार की एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद इस सप्ताह कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में देवी दुर्गा को समर्पित ‘दुर्गा अंगन’ मंदिर एवं सांस्कृतिक परिसर की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा, जनवरी के दूसरे सप्ताह में उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में महाकाल मंदिर परियोजना का उद्घाटन प्रस्तावित है।

इन कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सभी धर्मों का समान सम्मान करती है। दुर्गा अंगन के शिलान्यास समारोह में उन्होंने कहा,
“यह राजनीति का विषय नहीं है। यह हमारी संस्कृति, परंपरा और सौहार्द से जुड़ा हुआ विषय है। हर धर्म की अपनी मान्यताएं और उत्सव होते हैं, और मैं सभी का सम्मान करती हूं।”

हालांकि, विपक्षी दलों ने इन कदमों पर सवाल उठाए हैं। भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार सार्वजनिक धन का उपयोग धार्मिक संरचनाओं के निर्माण में कर रही है, जो संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार को धार्मिक परियोजनाओं के बजाय विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वहीं, वाम दलों ने भी मंदिर निर्माण को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है। उनका तर्क है कि धार्मिक प्रतीकों पर जोर देकर राज्य सरकार आर्थिक चुनौतियों, बेरोजगारी और औद्योगिक निवेश की कमी जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ममता बनर्जी की यह रणनीति भाजपा की आक्रामक हिंदुत्व राजनीति से अलग है। भाजपा जहां राष्ट्रीय स्तर पर एक समान हिंदू पहचान को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है, वहीं तृणमूल कांग्रेस बंगाल की विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को केंद्र में रख रही है। दुर्गा पूजा, जगन्नाथ और स्थानीय परंपराएं बंगाल की सामाजिक संरचना में गहराई से जुड़ी हुई हैं, और इन्हीं प्रतीकों के माध्यम से ममता बनर्जी एक “बंगाली हिंदू पहचान” को मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ उन हिंदू मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास है, जो हाल के वर्षों में भाजपा की ओर आकर्षित हुए हैं। ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का यह मॉडल प्रत्यक्ष वैचारिक टकराव के बजाय सांस्कृतिक समावेशन और धार्मिक आयोजनों की स्वीकार्यता पर आधारित है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दीघा का जगन्नाथ मंदिर पहले ही एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर चुका है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार का दावा है कि इस तरह की परियोजनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगी, रोजगार के अवसर पैदा करेंगी और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में सहायक होंगी। दुर्गा अंगन परियोजना को भी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों के लिए एक स्थायी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

फिर भी, यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह रणनीति तृणमूल कांग्रेस को चुनावी लाभ दिला पाएगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से वैचारिक संघर्ष, सामाजिक विविधता और तीव्र चुनावी प्रतिस्पर्धा से चिह्नित रही है। जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, मंदिर राजनीति और ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की यह बहस और अधिक तीव्र होने की संभावना है।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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