
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वामी विवेकानंद के निर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके प्रेरणादायक विचार और अद्वितीय व्यक्तित्व आज भी करोड़ों युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने में स्वामी विवेकानंद का योगदान अतुलनीय है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि स्वामी विवेकानंद के विचार विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश को नई ऊर्जा और प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनका आध्यात्मिक संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए भी समान रूप से प्रासंगिक रहेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने वेदांत, भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरण की भावना को मजबूत किया तथा रामकृष्ण मिशन की स्थापना के माध्यम से अध्यात्म और सेवा को संगठित स्वरूप प्रदान किया। अमित शाह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्श राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सनातन मूल्यों को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने देशभक्ति, सामाजिक सेवा, नैतिक विकास और चरित्र निर्माण का संदेश दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि आत्मविश्वासी, संस्कारित और सशक्त नागरिक ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था। वे श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य, महान दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली संतों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने भारतीय दर्शन और वेदांत को पश्चिमी देशों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके ऐतिहासिक संबोधन “सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका” ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों में वेदांत और भारतीय आध्यात्मिक दर्शन का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उनके विचारों से प्रेरित होकर पश्चिमी देशों में कई वेदांत सोसायटियों की स्थापना हुई।
भारत लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद ने 1898 में कोलकाता के निकट बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। वे एक महान लेखक और कवि भी थे तथा उन्होंने बंगाली, अंग्रेजी और संस्कृत में अनेक रचनाएं कीं। उन्होंने महिलाओं और विदेशी नागरिकों को भी वेदांत के अध्ययन, अभ्यास और उसके प्रचार-प्रसार में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
स्वामी विवेकानंद ने 4 जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में बेलूर मठ में ध्यानावस्था के दौरान महासमाधि ग्रहण की। आज भी उनके विचार युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।



