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‘जानलेवा’ 10-मिनट डिलीवरी? हैदराबाद में सड़क हादसे में ज़ेप्टो राइडर की मौत

In Social Issues
January 08, 2026
Rajneetiguru.com - 'जानलेवा' 10-मिनट डिलीवरी हैदराबाद में सड़क हादसे में ज़ेप्टो राइडर की मौत - Image Credited by Times NOW

हैदराबाद की सड़कों पर सोमवार की देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने गिग इकोनॉमी (gig economy) के मानवीय पहलू पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘ज़ेप्टो’ (Zepto) के लिए काम करने वाले 25 वर्षीय डिलीवरी पार्टनर के. अभिषेक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस घटना ने “10-मिनट” की अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी के दबाव और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर बहस को फिर से गरमा दिया है।

यह हादसा मेहंदीपट्टनम के पास हुआ, जब अभिषेक एक ऑर्डर पहुंचाने के लिए टोलीचौकी की ओर जा रहे थे। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि अभिषेक की दोपहिया गाड़ी अचानक फिसल गई और पीछे से आ रही एक निजी बस ने उन्हें कुचल दिया। अभिषेक, जो शेखपेट के निवासी थे और बीबीए अंतिम वर्ष के छात्र थे, अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए यह काम कर रहे थे।

‘घड़ी’ का घातक दबाव

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिलता है कि पीड़ित ऑर्डर पूरा करने की जल्दी में था जब उसकी बाइक सड़क पर फिसल गई।”

यही “जल्दी” देश भर में आक्रोश का केंद्र है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। यूनियन के संस्थापक-अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“10-मिनट की डिलीवरी समय पर शुरू होती है, करोड़ों के प्रोजेक्ट्स समय पर शुरू होते हैं, लेकिन जब कोई कर्मचारी सड़क पर दम तोड़ता है, तो उसका बीमा और मुआवजा कभी समय पर शुरू नहीं होता। कर्मचारी इंसान हैं, एल्गोरिदम नहीं।”

गिग वर्कर्स की असुरक्षा

भारत में गिग इकोनॉमी का तेजी से विस्तार हुआ है। नीति आयोग के अनुसार, 2030 तक इन श्रमिकों की संख्या 2.3 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, वे डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें अक्सर पारंपरिक कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती।

  • एल्गोरिदम का दबाव: राइडर्स को जीपीएस के जरिए ट्रैक किया जाता है और देरी होने पर उनकी रेटिंग और आय प्रभावित होती है।

  • जोखिम भरी सड़कें: भारी ट्रैफिक और तंग गलियों में 10 मिनट की समय सीमा का पालन करना राइडर्स को जोखिम भरा ड्राइविंग करने के लिए मजबूर करता है।

नियमों की आवश्यकता

अभिषेक की मौत एक ऐसे समय में हुई है जब देश भर में गिग वर्कर्स अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 25 दिसंबर 2024 को देश भर के करीब 40,000 राइडर्स ने हड़ताल की थी, जिसमें “असंभव” डिलीवरी लक्ष्यों को हटाने की मांग की गई थी।

हादसे के बाद, यूनियन ने सरकार से मांग की है कि:

  1. अभिषेक के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

  2. गिग वर्कर्स को ‘कामगार मुआवजा अधिनियम’ के दायरे में लाया जाए।

  3. 10-मिनट जैसे घातक डिलीवरी मॉडल्स को तत्काल बंद किया जाए।

2026 की शुरुआत में, केंद्र और राज्य सरकारें ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता’ (Code on Social Security) को लागू करने की दिशा में बढ़ रही हैं, लेकिन अभिषेक जैसे युवाओं के लिए ये नियम अभी भी कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।

निष्कर्ष

ज़ेप्टो जैसी कंपनियां दावा करती हैं कि डिलीवरी का समय राइडर की गति पर नहीं, बल्कि वेयरहाउस की निकटता पर निर्भर करता है। लेकिन हैदराबाद जैसे व्यस्त शहरों के ट्रैफिक में, यह दावा अक्सर हकीकत से दूर नजर आता है। अभिषेक की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है जो सुविधा को सुरक्षा से ऊपर रखता है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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