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अगरतला में सड़क के कुत्ते गायब, अवैध तस्करी का संदेह

In Social Issues
February 03, 2026
RajneetiGuru.com - अगरतला में सड़क के कुत्ते गायब, अवैध तस्करी का संदेह - AI Generated Image

अगरतला — त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के शांत इलाकों में इस समय चिंता की लहर दौड़ गई है। शहर में सड़क के कुत्तों के रहस्यमय ढंग से गायब होने का एक खतरनाक सिलसिला शुरू हुआ है। स्थानीय पशु कल्याण संगठनों और निवासियों ने आरोप लगाया है कि संगठित समूह ‘नसबंदी’ (sterilization) के झूठे बहाने सड़क के कुत्तों को अवैध रूप से उठा रहे हैं।

पिछले पखवाड़े में, शहर और उसके आसपास के कई इलाकों से मिलनसार और समुदाय द्वारा पाले गए कुत्तों के अचानक गायब होने की खबरें आई हैं। कुत्तों को पकड़ने के लिए जूट के बोरों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे विशेषज्ञों को डर है कि इन जानवरों को चिकित्सा प्रक्रिया के लिए नहीं, बल्कि अवैध रूप से दूसरे स्थान पर ले जाने या मांस के लिए सीमा पार तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है।

“जूट के बोरों” में कैद करने का तरीका

सबसे पहले अगरतला स्थित एनजीओ ‘पॉसम’ (Pawsome) ने इस मामले में आवाज उठाई। संगठन के प्रतिनिधि ऋिभेद दत्ता ने बताया कि उन्हें शहर के विभिन्न हिस्सों से कम से कम चार पुख्ता शिकायतें मिली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अज्ञात व्यक्ति वाहनों में आते हैं, जूट के बोरों का उपयोग करके कुत्तों को तेजी से पकड़ते हैं और उन्हें वैन में डाल देते हैं।

दत्ता ने कहा, “जब जागरूक स्थानीय लोगों ने उनसे पूछताछ की, तो इन व्यक्तियों ने दावा किया कि वे पशु जन्म नियंत्रण (ABC) या नसबंदी कार्यक्रमों पर काम करने वाले एनजीओ के प्रतिनिधि हैं।” उन्होंने स्पष्ट रूप से ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया। “कोई भी पेशेवर एनजीओ या सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसी कुत्तों को पकड़ने के लिए जूट के बोरों का उपयोग नहीं करती है। यह अमानवीय, असुरक्षित है और पशु प्रबंधन के हर प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता है। ऐसे आदिम तरीकों का उपयोग अवैध गतिविधि का स्पष्ट संकेत है।”

एनजीओ हाई अलर्ट पर: देर रात गश्त शुरू

इस संकट के जवाब में, ‘पॉसम’ ने अब सक्रिय निगरानी शुरू कर दी है। एनजीओ ने उन संवेदनशील क्षेत्रों में देर रात गश्त के लिए स्वयंसेवकों को तैनात किया है जहाँ से कुत्ते सबसे ज्यादा गायब हो रहे हैं। इसके अलावा, वे आपराधिक जांच शुरू करने के लिए त्रिपुरा पुलिस के पास औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं।

इन्हीं चिंताओं को दोहराते हुए, एक अन्य स्थानीय पशु कल्याण समूह ‘के नाइन’ (K Nine) ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कुत्तों के गायब होने की बढ़ती घटनाओं को “कुत्तों की तस्करी में चिंताजनक वृद्धि” से जोड़ा है।

के नाइन के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, “हमें रोजाना दिनदहाड़े स्वस्थ कुत्तों को उठाए जाने के संदेश मिलते हैं। हमारा काम केवल बीमार, घायल या लकवाग्रस्त कुत्तों के बचाव तक सीमित है। हम किसी भी कारण से स्वस्थ कुत्तों को नहीं उठाते हैं।” संगठन ने चिंता व्यक्त की कि ये बहरुपिए न केवल जानवरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि जनता और वास्तविक बचाव कर्मियों के बीच मेहनत से बने भरोसे को भी तोड़ रहे हैं।

कानूनी और सामाजिक संदर्भ: एक पृष्ठभूमि

भारत में सड़क के कुत्तों के प्रबंधन का मुद्दा हमेशा से चर्चा में रहा है। पशु जन्म नियंत्रण (नियम), 2023 के तहत, कानून यह अनिवार्य करता है कि सड़क के कुत्तों को केवल अधिकृत स्थानीय निकायों द्वारा नसबंदी और टीकाकरण के लिए उठाया जा सकता है और उन्हें ठीक उसी इलाके में वापस छोड़ना होगा जहाँ से उन्हें उठाया गया था।

‘अवैध विस्थापन’ यानी एक कुत्ते को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में ले जाना, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत एक दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद, प्रभावी सरकारी नसबंदी कार्यक्रमों की कमी से निराश कुछ लोग इलाके को “साफ” करने के लिए अवैध तरीके अपनाते हैं।

विशेषज्ञ की राय: तस्करी या विस्थापन?

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि जूट के बोरों का उपयोग और बड़े पैमाने पर कुत्तों का गायब होना केवल विस्थापन से कहीं अधिक संगठित अपराध की ओर इशारा करता है।

“त्रिपुरा जैसे सीमावर्ती राज्य में जब आप बड़े पैमाने पर कुत्तों को गायब होते देखते हैं, तो आप पड़ोसी क्षेत्रों में अवैध तस्करी की संभावना से इनकार नहीं कर सकते जहाँ कुत्ते के मांस का सेवन किया जाता है। हालांकि, ‘नसबंदी’ का झूठ जनता को शांत करने के लिए अवैध विस्थापन करने वालों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक पुराना बहाना है,” राष्ट्रीय पशु अधिकार विश्लेषक अर्पण शर्मा कहते हैं। “प्रशासन को यह अनिवार्य करना चाहिए कि सभी एबीसी वाहनों पर स्पष्ट संकेत हों और कर्मियों के पास सरकार द्वारा जारी आईडी कार्ड हों।”

सामुदायिक प्रभाव: शोक में डूबा मोहल्ला

दिब्येंदु चकमा जैसे निवासियों के लिए, यह एक व्यक्तिगत क्षति है। “हमारे मोहल्ले के कुत्ते हमारे समुदाय का हिस्सा थे। हमने उनका टीकाकरण कराया था और हम उन्हें खाना खिलाते थे। सुबह के समय उन्हें बोरों में भरकर ले जाते देखना दिल दहला देने वाला है। हम अब कड़ी निगरानी रख रहे हैं और हमने सभी से कहा है कि अगर वे संदिग्ध वाहन देखें तो वीडियो रिकॉर्ड करें,” उन्होंने कहा।

कार्रवाई का आह्वान: निवासी कैसे मदद कर सकते हैं

पशु कल्याण समूहों ने अगरतला के निवासियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  1. साख सत्यापित करें: आधिकारिक आईडी कार्ड और अगरतला नगर निगम (AMC) से प्राधिकरण पत्र दिखाने की मांग करें।

  2. उपकरण की जाँच करें: वैध नसबंदी कार्यक्रमों में जाली (Nets) का उपयोग किया जाता है, जूट के बोरों का नहीं।

  3. वाहन नंबर नोट करें: हमेशा वाहन और उसकी पंजीकरण प्लेट की फोटो लें।

  4. तत्काल रिपोर्टिंग: यदि कोई गतिविधि संदिग्ध लगे तो तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन या किसी स्थापित एनजीओ को फोन करें।

अगरतला प्रशासन और पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन शहर की दीवारों पर ‘लापता’ कुत्तों के पोस्टर बढ़ने के साथ ही दबाव बढ़ रहा है। अगरतला के सड़क के कुत्तों की सुरक्षा अब नागरिकों की जागरूकता और कानून की तत्परता पर निर्भर है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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