तिरुचेंदूर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य सत्तारूढ़ DMK के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल VCK के भीतर एक गंभीर आंतरिक संकट से हिल गया है। पिछले कई महीनों से सुलग रहा यह असंतोष गुरुवार को उस समय सार्वजनिक हो गया, जब VCK के युवा विंग के सचिव मुरसु तमिलप्पन ने वर्तमान DMK विधायक और राज्य मत्स्य पालन मंत्री अनीता आर. राधाकृष्णन के खिलाफ एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।
गठबंधन के सीट-बंटवारे के समझौते के खिलाफ इस सीधे विद्रोह ने पार्टी के भीतर हिंसा और अनुशासनात्मक कार्रवाई की लहर पैदा कर दी है। जहाँ VCK आलाकमान ने तुरंत कदम उठाते हुए तमिलप्पन को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया है, वहीं तिरुचेंदूर में जमीनी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि कैडर VCK के स्थानीय मामलों में DMK नेतृत्व के “हस्तक्षेप” को लेकर विभाजित हैं।
हिंसा और तोड़फोड़: एक विभाजित पार्टी
6 अप्रैल 2026 को तमिलप्पन द्वारा अपनी उम्मीदवारी औपचारिक रूप से पेश करने के कुछ ही घंटों बाद, यह मतभेद हिंसक हो गया।
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हमला: तिरुचेंदूर इकाई के सचिव विदुथलाई चेझियन और क्षेत्रीय सचिव राजकुमार के नेतृत्व में VCK कार्यकर्ताओं के एक समूह ने ‘डॉ. अंबेडकर मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी’ पर हमला किया।
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नुकसान: गवाहों के अनुसार, हमलावरों ने नाम पट्टिकाएं उखाड़ दीं और डॉ. बी.आर. अंबेडकर व VCK संस्थापक-अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन की तस्वीरों को अपवित्र किया। यह ट्रस्ट अनुसूचित जाति के युवाओं के लिए कोचिंग सेंटर चलाता है।
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प्रतिक्रिया: VCK जिला कोषाध्यक्ष टी. तमिलवानन ने राज्य नेतृत्व से एक शैक्षणिक संस्थान में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
“हस्तक्षेप” का कारक
इस विद्रोह की जड़ें स्थानीय VCK पदाधिकारियों की अनीता राधाकृष्णन के वर्चस्व के प्रति लंबे समय से चली आ रही शिकायतों में हैं।
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अपमान का आरोप: तमिलप्पन के नेतृत्व वाले गुट का आरोप है कि छह बार के विधायक राधाकृष्णन गठबंधन दल (VCK) के कार्यकर्ताओं के साथ तिरस्कारपूर्ण व्यवहार करते हैं।
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इस्तीफा: हाल ही में, VCK दक्षिण जिला सचिव डिलाइटा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से राधाकृष्णन द्वारा VCK कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार को कारण बताया था।
उम्मीदवार और निर्वाचन क्षेत्र: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
तिरुचेंदूर ऐतिहासिक रूप से अनीता राधाकृष्णन का गढ़ रहा है। 2001 में अपनी पहली जीत के बाद से, उन्होंने इस निर्वाचन क्षेत्र पर जबरदस्त पकड़ बनाए रखी है। 2021 के विधानसभा चुनाव में, राधाकृष्णन ने 50.58% वोट हासिल कर अपने AIADMK प्रतिद्वंद्वी को 25,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।
बागी की आवाज: “यह गरिमा की लड़ाई है”
निलंबन के बावजूद मुरसु तमिलप्पन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने मंत्री राधाकृष्णन पर उन्हें डराने के लिए उनके एजुकेशनल ट्रस्ट पर हमला करवाने का आरोप लगाया।
“यह सिर्फ एक चुनावी मुकाबला नहीं है; यह हमारे कार्यकर्ताओं की गरिमा की लड़ाई है। यदि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन वास्तव में गठबंधन को महत्व देते हैं, तो उन्हें उस मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो उन लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काता है जो गठबंधन की जीत के लिए काम करते हैं। मैं अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं लूंगा।” — मुरसु तमिलप्पन, निर्दलीय उम्मीदवार
VCK का राज्य नेतृत्व एक अजीब स्थिति में फंस गया है। जहाँ उन्होंने आधिकारिक तौर पर तमिलप्पन से दूरी बना ली है, वहीं अपने ही कार्यकर्ताओं द्वारा डॉ. अंबेडकर की तस्वीरों को नुकसान पहुँचाए जाने से पार्टी की छवि को धक्का लगा है।
जैसे-जैसे चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है, “तमिलप्पन फैक्टर” दलित वोटों में सेंध लगा सकता है, जो पारंपरिक रूप से DMK-VCK गठबंधन की ओर झुकते रहे हैं। मंत्री राधाकृष्णन ने अब तक अपने सहयोगी दल के इस आंतरिक कलह पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
