आगामी संसद सत्र से पहले एक अहम राजनीतिक बयान में कांग्रेस नेता सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि सभी विपक्षी दल Special Intensive Revision (SIR) के मुद्दे पर “पूरी तरह एकजुट” हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष एक साझा रुख अपनाएगा।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हुसैन ने कहा कि विपक्ष सरकार द्वारा लाए गए हर मुद्दे और हर बहस में हिस्सा लेने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “हम किसी भी बहस में भाग लेंगे जो सरकार प्रस्तावित करे, किसी भी विषय पर। हमने कभी बिलों या सरकारी एजेंडा से भागने की कोशिश नहीं की है।”
हुसैन के अनुसार, SIR की प्रक्रिया — जिसमें मतदाता सूचियों का व्यापक पुनरीक्षण शामिल है — कई विपक्षी दलों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। उन्होंने इसे मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से न हटे। उन्होंने कहा, “सभी विपक्षी दल एकजुट हैं… SIR सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।”
हालांकि SIR मुख्य मुद्दा है, विपक्ष संसद में कई अन्य विषय उठाने की तैयारी कर रहा है। इनमें शासन, जनकल्याण योजनाएँ, प्रशासनिक पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल शामिल हैं।
हुसैन ने कहा कि संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब सभी विषयों पर खुलकर बहस की जाए। उन्होंने कहा, “यदि संसद में बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा ही न हो, तो फिर इस संस्था के अस्तित्व का क्या अर्थ रह जाता है?”
SIR, यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट बनाए रखना है। जहां सरकार इसे डेटा का शुद्धिकरण मानती है, वहीं विपक्ष को आशंका है कि पारदर्शिता की कमी से वंचित समुदायों के मतदाता अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक होने के कारण चुनावी सुधारों और मतदाता सूची पर बहस का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की उम्मीद है। हुसैन ने कहा कि विपक्ष सभी विषयों पर सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से हिस्सा लेने के लिए तैयार है। उन्होंने दोहराया, “हमने कभी भी सरकारी कामकाज से दूरी नहीं बनाई। चाहे बिल हों, वित्तीय चर्चा हो या राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे — हम हमेशा शामिल रहे हैं।”
विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता सहयोग इस बात का संकेत है कि चुनावी सुधार और संस्थागत प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष एकजुट रूप से आवाज उठाना चाहता है।
अब नजरें इस बात पर हैं कि सरकार SIR पर विस्तृत चर्चा की इस संयुक्त मांग का कैसे जवाब देती है। आगामी संसद सत्र न केवल विधायी कामकाज बल्कि आने वाले महीनों के राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकता है।
